परिवार का सहयोग और समर्पण
अंजुम अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के समर्थन को देती हैं। उनके पिता शमीम अहमद और माता अख्तरी बेगम ने घर में पढ़ाई के लिए ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार किया कि उनकी की एकाग्रता न खराब हो। अंजुम बताती हैं कि उनके माता-पिता उनकी पढ़ाई को लेकर इतने संवेदनशील थे कि घर में वाशिंग मशीन चलाने से पहले भी उनसे पूछा जाता था ताकि शोर से उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। पूर्व में राजस्थान और दिल्ली न्यायिक सेवाओं में मिली असफलताओं के दौरान भी परिवार ने उनका साहस बनाए रखा और उन्हें निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप आज वह प्रदेश की टॉपर बनी हैं।
भावी अभ्यर्थियों के लिए सफलता के मंत्र
1. कानून की मूल भाषा पर अपनी पकड़ सबसे मजबूत रखें।
2.मेन्स परीक्षा के लिए उत्तर लिखने का लगातार अभ्यास करें।3.प्रतिदिन 5-6 घंटे की नियमित पढ़ाई को अपनी आदत बनाएं।
4. कोर्ट के फैसलों को पढ़ने और लिखने की बारीकियां जरूर सीखें।
5.असफलताओं से निराश न हों, निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है।
अंजुम ने अपने भविष्य के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं। अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि अब उनका एकमात्र लक्ष्य अपने न्यायिक कर्तव्यों का पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन करना है। वह न्यायपालिका में रहते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी प्राथमिकता के साथ पूरा करना चाहती हैं।