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Prayagraj: दिवाली पर छाया विज्ञान जगत में अंधेरा, नहीं रहीं प्रो. मंजू शर्मा, 2007 में मिला था पद्मश्री

Fri, 01 Nov 2024 05:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बीएचयू के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय की नातिन प्रो. मंजू शर्मा ने लखनऊ विश्वविद्यालय से वर्ष 1961 में जंतु विज्ञान में एमएससी करने के बाद पर्ड्यू विश्वविद्यालय, अमेरिका से बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी की उपाधि हासिल की।

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विस्तार
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इंस्टीट्यूशन बिल्डर’ के तौर पर विख्यात वैज्ञानिक और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी), प्रयागराज की एकमात्र महिला अध्यक्ष प्रो. मंजू शर्मा इस दुनिया में नहीं रहीं। बृहस्पतिवार तड़के 3:30 बजे उन्होंने एम्स, दिल्ली में अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार प्रो. मंजू पांच दिनों से एम्स में भर्ती थीं।

बीएचयू के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय की नातिन प्रो. मंजू शर्मा ने लखनऊ विश्वविद्यालय से वर्ष 1961 में जंतु विज्ञान में एमएससी करने के बाद पर्ड्यू विश्वविद्यालय, अमेरिका से बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी की उपाधि हासिल की।

13 फरवरी, 1940 को कानपुर में जन्मीं प्रो. मंजू शर्मा विवाह के बाद इलाहाबाद आ गई थीं। पति प्रो. विनोद प्रकाश शर्मा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग में शिक्षक थे, जिन्हें मलेरिया अनुसंधान के पितामह के रूप में भी जाना जाता है।

नीति-निर्माण और संस्था-निर्माण में प्रो. शर्मा की विरासत ने भारत के वैज्ञानिक समुदाय पर, विशेष रूप से नासी के भीतर एक अमिट छाप छोड़ी है, जहां उनके प्रभाव और प्रतिबद्धता ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

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प्रो. मंजू वर्ष 1995-96 में नासी की अध्यक्ष और वर्ष 2009 से 2013 तक नासी की महासचिव रहीं। उन्हें 2007 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। विवाह के बाद इलाहाबाद आईं प्रो. मंजू शर्मा नासी से जुड़ीं। उनकी देखरेख में नासी की बिल्डिंग का विस्तार हुआ। उन्होंने योजना आयोग में सलाहकार के तौर पर भी काम किया।
 

गंगा गैलरी प्रो. मंजू शर्मा की देन

प्रो. मंजू शर्मा जब भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में सचिव थीं, तब उन्होंने तत्कालीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रो. मुरली मनोहर जोशी के सहयोग से नासी में रिवर गैलरी प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। रिवर गैलरी प्रोजेक्ट का अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने मैसूर में कावेरी गैलरी, असम में ब्रह्मपुत्र गैलरी और प्रयागराज में गंगा गैलरी बनवाई।

कई संस्थानों की स्थापना में रही महत्वपूर्ण भूमिका

प्रो. मंजू शर्मा की राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (सीसीएमबी), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी (एनआईआई) समेत कई संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सीएम मोदी की थीं वैज्ञानिक सलाहकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब प्रो. मंजू शर्मा उनकी वैज्ञानिक सलाहकार थीं। नासी के कार्यकारी सचिव डॉ. संतोष शुक्ला बताते हैं कि प्रधानमंत्री बनने के लिए नरेंद्र मोदी ने प्रो. मंजू शर्मा को गुजरात में रिवर गैलरी बनाने का प्रस्ताव दिया था।

जैव विज्ञान के क्षेत्र में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

प्रो. मंजू शर्मा ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और विशेष रूप से जैव विज्ञान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विविध क्षेत्रों में कई सफल कार्यक्रमों की शुरुआत की और उन्हें बढ़ावा दिया। इनमें बायोमास उत्पादन और रूपांतरण, जैव उर्वरक, प्रकाश संश्लेषण अनुसंधान पर स्थिति रिपोर्ट, विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए पादप ऊतक संवर्धन, बायोस्फीयर रिजर्व, केरल में साइलेंट वैली और इसके संरक्षण पर रिपोर्ट, फसलों में ट्रांसजेनिक अनुसंधान, जर्मप्लाज्म संरक्षण, औषधीय और सुगंधित पौधे, खाद्य जैव प्रौद्योगिकी, नए टीके, मानव आनुवंशिकी आदि शामिल हैं।

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विज्ञान, नवाचार और संस्थागत विकास के प्रति अपने अटूट समर्पण के माध्यम से भारत के जैव प्रौद्योगिकी परिदृश्य को बदलने वाली अग्रणी महिला के नुकसान पर हमारे दुख की गहराई को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। प्रो. शर्मा की बुद्धिमत्ता, करुणा, अकादमी की प्रगति के लिए अथक प्रयास की बहुत कमी खलेगी लेकिन वे हमेशा हम सभी के लिए मार्गदर्शक प्रकाश बनी रहेंगी। विज्ञान और मानवता के लिए उनके असाधारण योगदान को हमेशा याद रखा जाए। - डॉ. संतोष शुक्ला, कार्यकारी सचिव, नासी

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