दंडी स्वामियों ने दलदली भूमि पर बसने से किया इन्कार
क्रासर
गंगा पार भूूमि निरीक्षण के बाद मेलाधिकारी के साथ समस्याओं पर चर्चा
दलदल पाटने के साथ ही छठवां पांटून पुल बनाने और नया गाटा मार्ग आवंटित करने की मांग प्रमुखता से उठाई
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। संगम की रेती पर माघ मेला बसाने के लिए भूमि आवंटन की शुरुआत 11 दिसंबर से होगी, लेकिन इससे पहले दलदल को लेकर साधु-संतों की त्योरी चढ़ गई। बृहस्पतिवार को दंडी स्वामी नगर की भूमि के निरीक्षण के दौरान अधिकतर क्षेत्रों में दलदल पाए जाने के बाद संन्यासी भड़क उठे। मेलाधिकारी कार्यालय में हुई बैठक में दंडी संन्यासियों ने तीन मुद्दे उठाए। चेताया कि अगर उनकी मांगों पर अमल नहीं किया गया तो दंडीस्वामी नगर के लिए संन्यासी भूमि आवंटित नहीं कराएंगे।
मेला प्रबंधक रविकांत द्विवेदी के साथ भूमि निरीक्षण के बाद अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम के साथ दंडी संन्यासियों का दल मेला प्राधिकरण कार्यालय पहुंचा। परिषद के महामंत्री स्वामी शंकर आश्रम, देवेंद्र आश्रम, आनंद सरस्वती, संगठन मंत्री रामाश्रम, प्रवक्ता ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी समेत कई संतों ने मेलाधिकारी अरविंद चौहान से दंडी स्वामी नगर के लिए छठवें पांटून पुल के निर्माण की बात कही। उनका कहना था कि रामानुज मार्ग पूर्वी पटरी पर एक गाटा और साथ में दिया जाए। जितनी भी भूमि दलदली है, उसे समतल बनाकर पाटा जाए। साथ ही हरिश्चंद्र मार्ग पर छठवें पांटून पुल के निर्माण का भी मुद्दा उठाया गया। संन्यासियों का कहना था कि जब तक इन मांगों पर अमल नहीं किया जाएगा, तबतक दंडी स्वामी नगर के भूमि आवंटन की प्रक्रिया में वह हिस्सा नहीं लेंगे। इस पर मेलाधिकारी ने शनिवार तक का समय देने के लिए कहा। उधर, आचार्यबाड़ा के अध्यक्ष रामेश्वराचार्य के अलावा घनश्यामाचार्य समेत कई संतों ने भूमि निरीक्षण के बाद मेलाधिकारी से मुलाकात की। आचार्यबाड़ा के संतों ने भी छठवें पांटून पुल के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
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प्रयागवाल सभा ने कल्पवासियों के लिए भूमि-सुविधाएं बढ़ाने का उठाया मुद्दा
प्रयागराज। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष शिव शर्मा और महामंत्री ऋतुराज मिश्र ने शुक्रवार को माघ मेले की विसंगतियों की ओर मेला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया। तीर्थपुरोहितों की सबसे बड़ी संस्था के पदाधिकारियों का कहना था कि सेक्टर तीन, चार और पांच में दलदली भूमि अधिक है। इन्हीं क्षेत्रों में कल्पवासियों के सर्वाधिक शिविर बसते हैं। उनका कहना था कि इस बार समय रहते दलदली भूमि को बालू और रेत से पाटकर शिविरों को बसाने योग्य बनाया जाना चाहिए। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष का कहना है कि कोरोना काल के दौरान जो बुजुर्ग कल्पवासी नहीं आ रहे थे, वह इस बार आ रहे हैं। ऐसे में शिविरों का भी विस्तार होना तय है। ऐसे में प्रयागवाल सभा की भूमि का रकबा बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि कल्पवासियों को बसाने में दिक्कतों का सामना न करना पडे़। भूमि के साथ ही सुविधाएं भी बढ़ाने की प्रयागवाल सभा ने आवाज उठाई है।