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नवजात कन्या को पाकर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को साकार करेगी रचना

Sat, 19 Oct 2019 05:57 AM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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लोक लाज का भय कहें या फिर बेटी को अभिशाप समझकर खेत में फेंके जाने घृणित कार्य। जन्म देने वाली मां ने भले ही नवजात को ठुकरा दिया, लेकिन रचना के लिए यह बच्ची ‘लक्ष्मी’ है। वह दिवाली पर इसे ईश्वर का अनुपम उपहार मानकर बेहद खुश हैं। ‘लक्ष्मी’ के आने से उनके सूने आंगन में बहार आ गई है। बच्ची की किलकारियां घर की रौनक बन गई हैं। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ भी जुट रही है। सभी उसकी मुस्कान पर हर्षित होने के साथ जन्म देने वाली मां को कोस रहे हैं। देखभाल कर रहा रचना का परिवार अब बच्ची को अपनाने के लिए हरसंभव कोशिश में जुट गया है। परिवार के अनुसार बच्ची को लक्ष्मी नाम दिया गया है।

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गुरुवार को नौगवां गांव के समीप एक खेत में बाइक पर तीन लोग नवजात बच्ची को फेंक गे थे। समाजसेवी मोनू शर्मा ने देखा तो वह भागकर खेत पर पहुंचे, लेकिन तब तक बच्ची को फेंकने वाले भाग गए। उनके मुताबिक, बाइक पर दो युवक और लाल साड़ी में एक युवती थी। इसके बाद वह बच्ची को लेकर थाने पहुंचे। उन्होंने घटना की पूरी जानकारी दी। पुलिस ने बच्ची का सीएचसी में परीक्षण कराया। डॉक्टरों ने उसे पूर्ण स्वस्थ बताया। इसी बीच नि:संतान दंपती रचना और राजू भारती सीएचसी पहुंच गए।

उन्होंने बच्ची को अपनाने के लिए कहा तो पुलिस ने उन्हें कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया होने तक बच्ची की देखभाल करने की बात कही, इस पर पुलिस ने बच्ची उन्हें सौंप दी। बच्ची के घर आने से रचना इस कदर खुश हैं मानो उन्हें संसार की सारी खुशियां मिल गईं हैं। रचना की सास भी बच्ची को अपनी मुराद मानकर उसकी देखभाल में जुटी हैं। घर पर बच्ची को देखने वालों की भीड़ लगी है।
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चना ने बच्ची को लक्ष्मी नाम दिया है। राजू भारती तो लक्ष्मी के आने की खुशी में एक कार्यक्रम करने की तैयारी में जुट गए हैं। उनका कहना है कि लक्ष्मी को अपनाने के लिए जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, उसे पूरा करेंगे। राजू ने बताया कि शादी के चार साल तक बाद भी संतान न होने से घर की रौनक ही गायब हो गई थी, जो लक्ष्मी के आने से लौट आई है।

रचना परीक्षा देने गईं देहरादून, बीस बार फोन कर जाना बच्ची का हाल
बच्ची को अपनाने वाली रचना शुक्रवार को बीएड का प्रैक्टिकल देने देहरादून चली गईं। वहां से उन्होंने करीब 20 बार फोन कर बच्ची का हाल जाना। उन्होंने कहा कि सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को वह सच करके दिखाएंगी। वह लक्ष्मी को सफलता के उस मुकाम पर पहुंचाएंगी ताकि बेटियों को बोझ समझने वालों को सबक मिले।

विधिक प्रक्रिया के तहत नि:संतान दंपती को बच्ची दी जा सकती है। अभी थाना पुलिस की रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी। संभव है कि दंपती को बच्ची मिल जाए। - ईशांत प्रताप सिंह, एसडीएम

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