यहां से दोबारा पार्थिव शरीर सैन्य वाहन में रखा गया और फिर रसूलाबाद घाट पर ले जाया गया। वहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई अंकुश ने मुखाग्नि दी। घाट पर पुलिस की ओर से भी शहीद को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
सौरभ तुम्हारा ये बलिदान, नहीं भूलेगा हिंदुस्तान...
शहीद का पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के लिए ले जाते वक्त भारत माता के जयकारे गूंजे। साथ ही कमांडेंट सौरभ अमर रहें, सौरभ तुम्हारा ये बलिदान, नहीं भूलेगा हिंदुस्तान के भी नारे लगाए गए। लोगों ने शहीद को नमन करने के साथ ही सलामी दी। इससे पहले घर से अंतिम संस्कार के लिए रसूलाबाद घाट ले जाने को निकलने से पहले कोस्ट गार्ड के अफसर अमित कुमार ने शहीद की पत्नी वासिता को उनकी कैप भी सौंपी।
कोई मेरे पापा को उठा दो...
पापा जागो न, कोई मेरे पापा को उठा दो, पापा क्यों नहीं उठ रहे...शहीद की छह साल की बेटी टीका की चीत्कार सुनकर मौके पर मौजूद लोगों के कलेजे कांप गए। परिजन बार-बार उसे चुप कराने की कोशिश करते। लेकिन, उसकी हालत देख खुद उनकी भी आंखें भर आ रही थीं। तीन साल के बेटे बाली को तो अहसास भी नहीं था कि अब वह पापा को कभी नहीं देख पाएगा। पत्नी वासिता एक टक तिरंगे में लिपटे पति के पार्थिव शरीर को निहारती रहीं। भाई अंकुश पहले तो खुद सभी को समझाता रहा कि कोई आंसू नहीं बहाएगा। लेकिन, जब अंतिम विदाई देने का वक्त आया तो वह भी अपने आंसू रोक नहीं पाया। पिता ज्ञान सिंह व मां सावित्री भी बेसुध रहे।
आगे पुलिस, पीछे सेना के वाहन ने किया एस्कॉर्ट
पार्थिव शरीर बमरौली एयरपोर्ट से घर और फिर वहां से रसूलाबाद घाट ले जाने के दौरान आगे पुलिस, जबकि पीछे सेना के वाहन ने एस्कॉर्ट किया। इस दौरान कोस्टगार्ड, सेना व एयरफोर्स के जवान-अफसर रास्ते भर भारत माता के जयकारे लगाते रहे। एक खास बात यह रही कि अंतिम यात्रा पर निकले शहर के सपूत को राहगीरों ने भी श्रद्धांजलि दी। शहीद का पार्थिव शरीर लेकर सैन्य वाहन जहां-जहां से गुजरा, रास्तों के किनारे खड़े लोगों ने सिर झुकाकर उन्हें सलामी दी।
मेयर पहुंचे पर नहीं आए विधायक, अफसर
शहीद को सलामी देने स्थानीय लोगों व रिश्तेदारों के अलावा मेयर गणेश केशरवानी भी पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि कमांडेंट सौरभ ने देश की सेवा करते हुए अपना बलिदान दिया, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। चौंकाने वाली बात यह रही कि मेयर के अलावा कोई विधायक, अफसर वहां नहीं पहुंचा।
जाते वक्त बोले थे, जल्द आऊंगा
मामा गजेंद्र यादव ने बताया कि सौरभ आखिरी बार नवंबर में घर आए थे। भाई की शादी में शामिल होने के लिए वह पहुंचे थे। दो दिसंबर को वापस गए। जाते वक्त कहा था कि जल्द ही फिर आऊंगा लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शहीद को श्रद्धांजलि देने उनके कौशाम्बी के अलीगंज, कोखराज स्थित पैतृक गांव से भी रिश्तेदार व बड़ी संख्या में ग्रामीण भी पहुंचे।