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आंदोलन में फूंक गए करोड़ों

Thu, 20 Jul 2017 02:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ.अनिल यादव के खिलाफ तथा भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर हुए उग्र आंदोलनों में करोड़ों रुपये खाक हो गए। इस दौरान हुई आगजनी में एक अनुमान की मुताबिक सिर्फ पुलिस विभाग को दो करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा था। रोडवेज, व्यापारियाें तथा आम लोगों की इससे कई गुना संपत्ति नुकसान हो गई। इतना ही नहीं इन आंदोलनाें की वजह से प्रभावित क्षेत्रों में 30 से अधिक दिन दुकानें भी बंद रहीं। इससे करोड़ों का व्यापारिक लेन-देन प्रभावित रहा।
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त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था के विरोध में 15 जुलाई 2013 को उग्र आंदोलनाें की शुरुआत हुई। इस दिन छात्रों और प्रतियोगियों ने जमकर उत्पात मचाया। इसमें सिविल लाइंस बस अड्डे के पास कई बसों में तोड़फोड़ की। बड़ी संख्या में छात्र बस अड्डा परिसर में भी घुस गए तथा दर्जनाें बसों में तोड़फोड़ की। इस आगजनी में कई माल, दुकानों पर भी पत्थरबाजी की जिससे काफी नुकसान हुआ। इसके बाद जुलाई में दो मौके और आए जब लाखों रुपये की संपत्ति बवाल और आगजनी की भेंट चढ़ गई।  इस बवाल के बाद आयोग ने आरक्षण की पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी लेकिन प्रतियोगियों का आंदोलन इसके बाद भी समाप्त नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने अध्यक्ष को हटाने तथा भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर तेज आंदोलन शुरू कर दिया।

इतना ही नहीं फैसला वापस लेने के विरोध में आरक्षण समर्थकों ने भी बवाल शुरू कर दिया। उनकी ओर से 17 सितंबर 2013 को महापंचायत की घोषणा की गई। महापंचायत जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव और अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी संबोधित करना था लेकिन दोनों नेताओं को एक दिन पहले रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं, प्रतियोगियों को भी जगह-जगह रोक लिया गया तथा गिरफ्तार किया गया। इसके विरोध में शहर ही नहीं गांवों में भी जमकर आगजनी हुई। इस दौरान कई ऐसे मौके भी आए जब प्रतियोगियों के दोनों गुट आमने-सामने आए। इस टकराव में सिविल लाइंस के अलावा छोटा बघाड़ा, सलोरी आदि मोहल्लों में कई दुकानों और बसाें में तोड़फोड़ हुई तो पूरे शहर में तनाव भी बना रहा।
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छोटी-बड़ी घटनाओं के बाद दो जनवरी 2014 को एक बार फिर पूरा शहर आयोग अध्यक्ष के खिलाफ शुरू आंदोलनों की आग में जला। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर चल रहे अनशन के समर्थन में दो जनवरी को भारी भीड़ जुटी। छात्रों को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी संबोधित किया था। इस दौरान नोकझोंक के बाद पुलिस ने परिसर में घुसकर छात्रों और प्रतियोगियों की जमकर धुनाई की। इसके विरोध में छात्रों और प्रतियोगियों ने पूरे शहर में तोड़फोड़, आगजनी की। छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह तांडव तीन और चार जनवरी को भी जारी रहा। इसके बाद भी समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होता रहा। आयोग अध्यक्ष के खिलाफ छात्रों और प्रतियोगियों का आंदोलन चल ही रहा था कि  पेपर लीक होने के बाद इसमें एक फिर तेजी आ गई और 15 अप्रैल 2015 को बड़ा आंदोलन हुआ।

अक्तूबर 2015 में आयोग के खिलाफ 3160 मुकदमे थे तथा न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। प्रतियोगियों के असंतोष का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि इनमें से ज्यादातर मामले डॉ. अनिल यादव के समय के हैं। सीबीआई जांच की मांग को लेकर तीन याचिका अब भी न्यायालय में है। सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रतियोगी 100 से अधिक बार सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर 17 बार लाठीचार्ज हुआ। पीसीएस का पेपर आउट होने के बाद आंदोलनरत प्रतियोगियों पर इसी साल 15 अप्रैल को लाठीचार्ज हुआ था। इस दौरान छह बार प्रतियोगियों को जेल जाना पड़ा। सरकार की ओर से दबाव बनाने के लिए कई प्रतियोगियों पर गुंडा ऐक्ट जैसे गंभीर धाराओं में मुकदमें लिखे गए। इसकी आड़ में उन पर अब भी दबाव बनाया जाता है।
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