कोर्ट ने पाया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच की निगरानी के लिए मनीष कुमार सिंह के केस में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चाधिकारियों को समिति गठित करने का निर्देश दिया था। आदेश के अनुपालन में समिति का गठन दो साल की देरी से हुआ पर उसकी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं दिखा। कोर्ट ने समिति की सक्रियता और कार्य प्रगति की रिपोर्ट तलब की। तीन दिसंबर 2025 से अब तक आठ तारीखें लगीं, अपर महाधिवक्ता ने अदालत को मांगी गई जानकारी मुहैया कराने का भरोसा दिलाया। इसके बावजूद महीनों बाद फैसला सुनाने की तारीख तक अफसर जानकारी नहीं दे सके।
अफसरों की कार्यसंस्कृति पर सीएम दें ध्यान
कोर्ट ने कहा कि सीएम को इस आदेश की प्रति पहुंचाई जाए, ताकि वे ध्यान दें कि बार-बार मौका दिए जाने के बाद भी अफसर अदालत को अंधेरे में रखने की कोशिश करते है। लिहाजा, अफसरों की इस कार्यसंस्कृति की जानकारी सीएम तक पहुंचाई जानी चाहिए। ताकि, सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ बनाई नीति पर अफसरों की लापरवाही पर लगाम लगाई जा सके।