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इंजेक्शन लगाते ही युवती की मौत, परिजनों का हंगामा

Sun, 14 May 2017 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मिर्गी पीड़ित युवती की इंजेक्शन लगाने के कुछ ही देर बाद मौत होने पर शनिवार शाम न्यूरो सर्जन कार्तिकेय शर्मा के सिविल लाइंस स्थित निवास पर हंगामा हो गया। परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की लापरवाही से उनकी बेटी की जान गई है। आरोप लगाया कि हालत बिगड़ने पर बेटी समेत धक्का देकर बाहर निकाल रिक्शा पर अस्पताल भेजा गया था। वे डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े थे। पुलिस उन्हें समझाने की कोशिश करती रही। आधी रात परिजन शव लेकर रायबरेली चले गए।
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रायबरेली के सरेनी इलाके में रहने वाले लाल ूसिंह की बेटी ज्योति सिंह (20) को मिर्गी के दौरे पड़ते थे। साथ ही उसे मानसिक बीमारी थी। एक रिश्तेदार की सलाह पर करीब आठ महीने से ज्योति का इलाज न्यूरो सर्जन डॉ.कार्तिकेय शर्मा से कराया जा रहा था। शनिवार शाम भी ज्योति को लेकर उसकी मां सुमित्रा और भाई विजय प्रताप सिविल लाइंस में क्लाइव रोड स्थित डॉ.कार्तिकेय के निवास पहुंचे। चेकअप कर डॉक्टर ने दवाओं के अलावा फौरन दो इंजेक्शन लगाने के लिए पर्चा लिखा। मां के मुताबिक, कम्पाऊंडर ने ज्योति को इंजेक्शन लगाए तो कुछ ही पल बाद वह तड़पने लगी। उसके मुंह से झाग निकल आया। मां और भाई का आरोप है कि वे डॉक्टर के पास गए पर उन्होंने कह दिया कि आनंद हॉस्पिटल ले जाओ। कर्मचारियों ने ज्योति को जबरन बाहर लाकर रिक्शा पर डाला और कहा ले जाओ इसे।

ज्योति को लेकर मां और भाई हॉस्पिटल पहुंचे तो उसे मृत बताकर डॉक्टरों ने घर ले जाने के लिए कहा। वहां से ज्योति का शव एंबुलेंस में रखकर परिजन डॉक्टर के निवास पहुंचे और बेटी को मार डालने का आरोप लगाते हुए चीख-पुकार करने लगे। कुछ परिचित और रिश्तेदार भी आ गए। हंगामा बढ़ा तो सिविल लाइंस थाना प्रभारी मनोज तिवारी पुलिस बल के साथ पहुंच गए। उन्होंने परिजनों के साथ ही डॉ.कार्तिकेय से भी इस बारे में जानकारी ली। डॉक्टर ने कहा कि मरीज की हालत सीरियस थी इसलिए फौरन इंजेक्शन लगाए गए। कोई लापरवाही नहीं की गई। परिवार के लोग भावावेश में आरोप लगा रहे हैं। रायबरेली से रात में ज्योति के भाई अजय प्रताप और पिता लालू समेत कुछ और लोग आकर चीख-पुकार करने लगे। उनकी मांग थी कि फौरन डॉक्टर की गिरफ्तारी हो। इंस्पेक्टर के साथ ही सीओ डीपी तिवारी  परिवार के लोगों को मनाते रहें कि वे तहरीर दें तो केस लिखकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। हालांकि आधी रात परिजन एंबुलेंस में शव लेकर रायबरेली चले गए। इंस्पेक्टर के मुताबिक, तहरीर भी नहीं दी है।
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-रोते-रोते बेहाल मां सुमित्रा ने पुलिस अफसरों के सामने आरोप लगाया कि उनकी बेटी ज्योति की मौत इलाज में लापरवाही और डॉक्टर की संवेदनहीनता की वजह से हुई है। इंजेक्शन लगाने पर ज्योति तड़पने लगी तो उन्होंने डॉक्टर से हाथ जोड़कर मिन्नत की कि उसे देख लें मगर डांटकर भगा दिया गया। कर्मचारियों ने तड़प रही ज्योति को गठरी की तरह उठाकर गेट के पास रिक्शा पर डाल दिया और कहा ले जाओ। एंबुलेंस में भेजा जाता तो शायद ज्योति की जान बच सकती थी।
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