फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिधर चाहा, उधर गए प्रदर्शनकारी, बेबस दिखी पुलिस

Tue, 03 Apr 2018 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों के सामने भारी फोर्स की भी एक नहीं चली। प्रदर्शनकारियों ने जिधर चाहा, उधर गए। जब जहां चाहा, प्रदर्शन किया। उनके सामने पुलिस बेबस खड़ी नजर आई। यहां तक कि सिविल लाइंस में भारी फोर्स भी उन्हें आगे बढ़ने से रोक नहीं सकी। पांच घंटे तक कुछ ऐसा ही नजारा सड़कों पर दिखा और पुलिस पीछे-पीछे घूमती रही।
विज्ञापन


कचहरी रोड पर लोगों के जमावड़े की सूचना पर ही भारी फोर्स मौके पर बुला ली गई थी। वहां से प्रदर्शनकारियों के कूच करने पर संबंधित चौराहों पर तो फोर्स तैनात की ही गइ। बड़ी संख्या में जवान जुलूस के पीछे-पीछे भी चल दिए। ट्रैफिक चौराहे पर प्रदर्शनकारियों ने जाम लगाया तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें हटाने की कोशिश की। हालांकि यह कोशिश नाकाम रही। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का हुजूम म्योहाल चौराहे पर पहुंचा और यहां भी आवागमन बाधित कर दिया। पुलिसवालों ने जाम खत्म कराना चाहा तो मामला तनावपूर्ण हो गया। इस पर अफसरों ने मामला संभाला। दो बजे के करीब प्रदर्शनकारी सुभाष चौराहे पर पहुंच चुके थे और धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती जा रही थी। इस पर सीओ श्रीश्चंद्र के साथ ही एएसपी सुकीर्ति माधव और एसपी सिटी सिद्धार्थशंकर मीणा भारी फोर्स लेकर पहुंच गए। सिविल लाइंस के साथ ही कैंट व धूमनगंज थाने की फोर्स भी बुला ली गई।

बवाल की आशंका थी ऐसे में पीएसी के साथ ही आरएएफ को भी बुलाया गया। कुछ देर तक नारेबाजी करने के बाद भीड़ जंक्शन की ओर जाने के लिए आगे बढ़ने लगी। इस पर पुलिस ने लोगों को रोकने की कोशिश की। हालांकि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को धकियाते हुए आगे बढ़ गए। माहौल को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने भी पीछे हटना मुनासिब समझा। उधर भीड़ सुभाष चौराहे से हाईकोर्ट की ओर बढ़ी तो पुलिस पीछे-पीछे लग गई। इसके बाद प्रदर्शनकारी जहां-जहां गए, पुलिस मूकदर्शक बनी उनके पीछे-पीछे घूमती रही। जंक्शन से वापस आने पर सुभाष चौराहे, रोडवेज बस स्टैंड, हनुमान मंदिर, कंपनी गार्डेन, हिंदू हॉस्टल चौराहा, सेंट एंथोनी कॉलेज से लेकर बालसन चौराहे तक फोर्स प्रदर्शनकारियों के पीछे-पीछे चलती रही। इस संबंध में पुलिस अफसरों का कहना है कि फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता यही थी कि किसी तरह की हिंसा न होने पाए। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करते रहे। पुलिस एहतियात के तौर पर उनके साथ लगी रही। छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो पुलिस अपने प्रयास में काफी हद तक सफल भी रही।
विज्ञापन


शाम चार बजे के करीब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पीवीआर के पास एक होटल के सामने जाम लगा दिया। आरोप था कि किसी पुलिसकर्मी ने एक प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मार दिया। इस पर भारी फोर्स मौके पर पहुंच गई। सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्रा के साथ सीओ करछना रत्नेश सिंह ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। साथ ही उन्हें वापस जाने की सलाह दी। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी। अगले ही पल अफसरों को अनसुना कर प्रदर्शनकारी सुभाष चौराहे की ओर बढ़ गए। इससे पहले प्रदर्शन के दौरान ही एक मीडियाकर्मी से भी प्रदर्शनकारियों की नोकझोंक हुई।

प्रदर्शनकारियों की भीड़ में शामिल कुछ युवकों ने सुभाष चौराहे पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का भी पुतला फूंकने की कोशिश की। युवक दोनों पुतले लेकर आगे बढ़े ही थे कि पुलिस ने उन्हें रोक दिया। वह मिट्टी का तेल भी लिए हुए थे। रोकने पर भी युवक नहीं माने तो पुलिस ने पुतले छीन लिए।

बवाल की आशंका को देखते हुए सोमवार को सिविल लाइंस इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया था। सिविल लाइंस के साथ ही कर्नलगंज, कैंट, धूमनगंज, कोतवाली समेत कई थानों की फोर्स मौके पर मौजूद रही। ग्रामीण क्षेत्रों के कई थानों की फोर्स भी बुलाई गई। इनमें खीरी, घूरपुर, बारा आदि थानों की फोर्स शामिल रही। इसके अलावा पीएसी व आरएएफ की कई टुकड़ियां विभिन्न चौराहों पर तैनात की गई थीं। चौराहों पर वज्र वाहन भी तैनात रहे।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें