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यूको बैंक में चोरी करने वाले गिरोह तक पहुंची पुलिस, एक पकड़ा गया

Sat, 05 May 2018 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सिविल लाइंस स्थित यूको बैंक में 17 लॉकर तोड़कर करोड़ों की चोरी करने वाले गिरोह तक आखिरकार पुलिस पहुंच ही गई। पुलिस ने गिरोह के एक सदस्य को झारखंड के साहबगंज जिले से हिरासत में ले लिया है। सूत्रों की मानें मो पूछताछ के दौरान उसने अपने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने की बात कबूल ली है। पुलिस अब उसके साथियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। हालांकि पुलिस अफसर इस बारे में अभी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
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 यूको बैंक में 29 अप्रैल की रात शातिर चोरों के गिरोह ने 17 लॉकर तोड़कर करोड़ों का माल पार कर दिया था। तीन दिन की छुट्टी के बाद एक मई को बैंक खुला तो लोगों को घटना की जानकारी हुई। मामले के खुलासे में एसटीएफ, क्राइम ब्रांच समेत पुलिस की सात टीमें लगाई गई हैं। टीमों ने कुंडा, सुल्तानपुर के साथ ही पश्चिम बंगाल के मालदा में दबिश दी। जांच-पड़ताल के दौरान मिले कुछ अहम क्लू के आधार पर पुलिस ने मंगलवार देर रात कौशाम्बी और करेली में रहने वाले दो लोगों को पकड़ा। सूत्रों की मानें तो पहले तो वह पुलिस को टरकाने की कोशिश करते रहे। हालांकि सख्ती से पूछताछ के दौरान कुछ अहम जानकारियां दीं। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से एक शातिर अपराधी को पकड़ा। पता चला कि वह पहले भी बड़ी चोरियों के मामले में जेल जा चुका है। सख्ती से पूछताछ में उसने यूको बैंक में करोड़ों की चोरी के मामले में संलिप्तता कबूल ली। उसने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया है कि इस सनसनीखेज वारदात को झारखंड के एक गिरोह ने अंजाम दिया। पुलिस की एक टीम ने अब गिरोह की तलाश में झारखंड के साहबगंज जिले में छापेमारी शुरू कर दी है।

पकड़े गए शातिर से पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला है कि यूको बैंक में चोरी की घटनाओं में गिरोह के पांच सदस्य शामिल थे। वारदात को अंजाम देने से पहले फुलप्रूफ प्लानिंग भी की गई थी। वारदात में शामिल सभी सदस्यों का अलग-अलग काम तय था। जैसे एक सदस्य को सिर्फ इलेक्ट्रानिक सिक्योरिटी सिस्टम ध्वस्त करने का काम दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक जल्द ही पुलिस मामले का खुलासा कर सकती है।
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हिरासत में लिए गए कौशाम्बी और करेली निवासी युवकों के बारे में जांच में जुटी टीमों को पता चला है कि वह वारदात के वक्त मौके पर मौजूद नहीं थे। लेकिन उन्होंने गिरोह के सदस्यों को पनाह दी। साथ ही उन्हें इलाके के बारे में जानकारी दी। सूत्रों की मानें तो पूछताछ में यह भी पता चला है कि गिरोह के सदस्यों ने वारदात को अंजाम देने से पहले करीब छह माह तक रेकी भी की थी। वह कई बार बैंक में भी गए।

जांच में जुटी टीमों की मानें तो जिस साहबगंज जिले में गिरोह के सदस्यों की तलाश में छापेमारी की जा रही है, वह झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा के पास ही स्थित है। गंगा नदी के इस पार झारखंड का साहबगंज जिला पड़ता है जबकि दूसरी ओर से पश्चिम बंगाल का मालदा जिला स्थित है। सीमा के पास होने के कारण ही गिरोह के सदस्य अक्सर एक से दूसरी जगह आसानी से चले जाते हैं। आशंका इस बात की भी है कि गिरोह के अन्य सदस्य बांग्लादेश भाग निकले हों। फिलहाल पुलिस टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं।
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