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पुआल में खेल रहे दो सगे भाई जिंदा जले

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थरवई थाना क्षेत्र के तारडीह गांव के रईमपुर में पुआल में खेल रहे दो सगे भाई जिंदा जल गए। रविवार दोनों भाई पुआल में खेल रहे थे तभी उसमें आग लग गई। देखते ही देखते ऊंची लपटें निकलनी लगीं। बच्चों की मां शकुंतला देवी और ग्रामीण आग बुझाने के लिए दौड़े लेकिन तब तक छह वर्ष के अजय कुमार और तीन वर्ष के विजय कुमार की मौत हो चुकी थी। आग बुझाकर दोनों के शव को बाहर निकाला गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों बच्चों के शव को कब्जे में ले लिया। शकुंतला यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। जिन बच्चों को वह हंसता खेलता छोड़ गई थी, उनकी यह दशा देखकर वह बेहोश हो गई। पुलिस यह मान रही है कि पुआल में माचिस रखी हुई थी। बच्चों ने खेल-खेल में माचिस जला दी थी और देखते ही देखते आग भड़क गई थी। किसी प्रकार की साजिश की बात से इंकार किया जा रहा है।
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शकुंतला अपने दोनों बच्चों के साथ गांव में अकेली रहती थी। पति विक्रमाजीत भिमंडी में मजदूरी करता है। घर से डेढ़ किमी की दूरी पर खेत में वह गेहूं की बुआई करने गई थी। खलिहान में आसाराम बिंद और शकुंतला का 50 बोझ पुआल और धान रखा हुआ था। पास ही लोगों ने बैठने के लिए पुआल को घेरकर उस पर छप्पर लगा दिया था। दिन में जब शकुंतला काम करने पहुंची तो उसने अजय और विजय को पुआल के पास खेलने के लिए छोड़ दिया। वह खेत में बुआई के काम में जुट गई। इसी बीच शकुंतला ने पुआल से धुआं उठता देखा तो वह सहम गई। वह दौड़ते हुए पुआल के करीब पहुंची लेकिन तब तक छप्पर से भी लपटें निकलने लगी थीं। ग्रामीण भी जुट गए। शकुंतला बच्चों का नाम लेकर चीखती रही लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। ग्रामीणों को पता चला कि पुआल में बच्चे हैं तो तुरंत आग को बुझाया गया। बच्चों के बुरी तरह जले हुए शव बाहर निकाले गए। आग इतनी तेजी से फैली थी कि बच्चे चीख भी नहीं सके थे। ग्रामीण उसे ढांढस बंधाते लेकिन उनकी आंखों से तो आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। मौके पर पुलिस भी पहुंच गई।
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