जीआरपी ने शुक्रवार को प्लेटफार्म नंबर दो से तेंदुए की खाल के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। रीवा और चित्रकूट के जंगलों से इस तेंदुए का शिकार किया गया था। इस घटना से प्रतिबंधित जानवरों के शिकार और खाल की तस्करी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। हालांकि तेंदुए का शिकार करने वाले अभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े हैं।
प्रतिबंधित जानवरों की खाल की तस्करी की सूचना जीआरपी इंस्पेक्टर मनोज सिंह को मिली थी। एक मुखबिर के माध्यम से जसरा के बबलू भारती का नाम पता चला था जो पिछले कुछ महीनों से यह काम कर रहा था। तस्कर गिरोह को एक साथ पकड़ने के लिए जीआरपी इंस्पेक्टर ने खुद ग्राहक बनकर बबलू को फोन किया। तेंदुए की खाल की कीमत 35 लाख से शुरू हुई। अंत में 10 लाख पर बात तय हुई। तस्करों को प्लेटफार्म नंबर दो पर बुलाया गया। यहीं पर 10 लाख देकर खाल लेना था। शुक्रवार को तस्कर जैसे ही आए जीआरपी की टीम ने उन्हें धर दबोचा। मौके से बबलू भारती के अलावा शंकरगढ़ के शिवराजपुर का पुनीत त्रिपाठी और बारा के उड़ी गौहानी गांव का धीरेंद्र सिंह पटेल भी पकड़ गया। उनके पास से तेंदुए की खाल बरामद कर ली गई।
पूछताछ में कुछ सफेदपोश अपराधियों समेत एक बड़े नेक्सस का खुलासा हुआ। आज पकड़े गए तीनों तो उस नेक्सस के छोटे मोहरे हैं। रीवा और चित्रकूट के जंगलों में न सिर्फ तेंदुए बल्कि हिरन समेत तमाम प्रतिबंधित जानवरों को शिकार किया जाता है। खालों को न सिर्फ दिल्ली बल्कि मुंबई और नेपाल तक भेज दिया जाता है। पुनीत, बबलू और धीरेंद्र मुख्य रूप से बिचौलिये का काम करते हैं। बबलू एक शातिर अपराधी है जो पहले ट्रक लूट में भी जेल जा चुका है।
प्रतिबंधित जानवरों के खाल की तस्करी करने वालों को पकड़ने के बाद जीआरपी ने एमपी पुलिस को एलर्ट भेजा है। तस्करों से कुछ शिकारियों और नेक्सस चलाने वालों के नाम मिले हैं। उन नामों को एमपी पुलिस से साझा किया गया है। जीआरपी इंस्पेक्टर का कहना है कि तस्करों के पकड़े जाने के बाद जाहिर है शिकारी भी सतर्क हो गए होंगे। इसके बाद भी पुलिस शिकारियों को पकड़कर नेक्सस को खत्म करने का प्रयास करेगी।