औद्योगिक थाना क्षेत्र के महुआरी गांव के समीप बृहस्पतिवार रात दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक पर कंक्रीट स्लीपर रखकर ट्रेन को पलटाने की कोशिश की गई। शाहगंज स्पेशल मालगाड़ी स्लीपर से टकरा गई तो खबर मिलने के बाद कालका एक्सप्रेस को छिवकी स्टेशन पर रोक दिया गया। पैट्रोलिंग पर गए आरपीएफ सिपाहियों को ट्रैक पर कंक्रीट के दो स्लीपर पड़े मिले। ट्रैक क्लीयर करने के बाद आसपास के इलाके में सर्च आपरेशन चलाया गया। पास ही खेत में अकोढ़ा कौंधियारा का विकास सिंह और एक किशोर मिला। किशोर कोरांव के बदौनी गांव का है और 11वीं में पढ़ता है। दोनों ने बताया कि ट्रेन को पलटाने के बाद लूटपाट की योजना थी। साजिश में चार और लोग भी शामिल हैं। आरपीएफ ने दोनों को बाद में औद्योगिक क्षेत्र पुलिस को सौंप दिया। पुलिस देर रात तक उनसे पूछताछ कर रही थी। घटना के पीछे नक्सली साजिश से भी इनकार नहीं किया गया है।
ट्रैक पर स्लीपर पड़े होने की जानकारी रात दस बजे शाहगंज स्पेशल मालगाड़ी के ड्राइवर ने दी थी। मुगलसराय की ओर जा रही ट्रेन के ड्राइवर ने डाउन लाइन के पोल 812/20-22 के समीप ट्रैक पर दो स्लीपर देखे तो ब्रेेक लगा दिया। हालांकि इंजन स्लीपर से टकरा गया। इससे एक स्लीपर टूट गया। दूसरा स्लीपर पटरियों केे बीच पड़ा था। मालगाड़ी के गार्ड ने करछना स्टेशन को जानकारी दी और ट्रेन को लेकर रवाना हो गया। खबर पाकर आरपीएफ सिपाही विश्राम और अभय नारायण शर्मा पैट्रोलिंग पर निकले। दोनों जब रात में 11 बजे महुआरी गांव के पास पहुंचे तो मुगलसराय ट्रैक पर स्लीपर पड़े मिले। कुछ ही देर में कालका एक्सप्रेस इसी ट्रैक से गुजरने वाली थी। खबर मिलते ही उसे छिवकी स्टेशन पर रोक दिया गया। दोनों सिपाहियों ने ट्रैक से स्लीपर को हटाया। करीब 20 मिनट बाद कालका एक्सप्रेस रवाना की गई। सूचना पाकर आरपीएफ इंस्पेक्टर पीके राणा दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। बड़ी साजिश की आशंका को देखते हुए आसपास के इलाके में सर्च आपरेशन चलाया गया।
पकड़े गए विकास और उसके नाबालिग साथी ने जो जानकारी दी, उससे आरपीएफ के होश उड़ गए। विकास ने बताया कि वह जिस ट्रांसपोर्टर की गाड़ी चलाता था, उसने उसे एडीए मोड़ पर बुलाया था। वह अपने दोस्त के साथ वहां पहुंचा तो ट्रांसपोर्टर के साथ तीन और लोग भी मिले। उनसे कहा कि एक काम करना है। बदले में तीन-तीन हजार रुपये मिलेंगे। सभी बाइक से महुआरी गांव पहुंचे। वहां पर ट्रांसपोर्टर और उसके साथी ने तमंचा निकाल लिया और उन लोगों से जबरन स्लीपर को पटरी पर रखवाया।
दोनों के मुताबिक मालगाड़ी को गिराने में नाकाम होने पर फिर से दो स्लीपर ट्रैक पर रखवाए गए थे लेकिन आरपीएफ इससे इनकार कर रही है। आरपीएफ इंस्पेक्टर के मुताबिक ट्रैक पर एक ही बार दो स्लीपर रखे गए थे। घटना के बाद दोनों खेत में छिप गए थे। आरपीएफ दिन भर पकड़े गए युवकों से पूछताछ करती रही। जब जीआरपी ने युवकों को लेने से इनकार कर दिया तो आरपीएफ ने रात में औद्योगिक क्षेत्र थाने में दोनों को सौंप दिया। एफआईआर छिवकी के सीनियर सेक्शन इंजीनियर गिरजाशंकर ने दर्ज कराई। उन्होंने तहरीर में घटना का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है। एफआईआर अज्ञात में लिखी गई थी। इसमें बाद में पकड़े गए विकास और उसके नाबालिग साथी के के नाम जोड़े गए। विकास का साथी नैनी के एक स्कूल में पढ़ता है। उसके पिता किसान हैं।
दोनों बार-बार बयान बदल रहे हैं। पहले वह ट्रांसपोर्टर पर लूटपाट की साजिश रचने का आरोप लगा रहे थे लेकिन जब पुलिस ने ट्रांसपोर्टर से सामना करवाया तो वे पलट गए। कहा कि हमारे दूसरे साथियों ने यह योजना बनाई थी। हालांकि वह अपने साथियों का नाम नहीं बता रहे। दोनों का बस यही कहना था कि उनको जबरन लाया गया था। मालगाड़ी या यात्री ट्रेन से कैसे लूट करते, इसका जवाब दोनों नहीं दे पा रहे। इस मामले के तार नक्सलियों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस इससे इनकार नहीं कर रही है।