साइकिल पर स्कूल जा रही दो सगी बहनों को शनिवार सुबह मीरगंज गांव के सामने बालू लदे ट्रक ने कुचल दिया। ड्राइवर और खलासी को पीटने के बाद आक्रोशित लोगों ने शवों के पास सड़क पर चक्काजाम कर दिया। बवाल की आशंका पर गंगापार के सभी थानों की पुलिस फोर्स बुला ली गई। एसपी गंगापार और एसडीएम फूलपुर समेत कई अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीण बीस लाख मुआवजा की मांग कर रहे थे। एसडीएम के आश्वासन पर लोग शांत हुए तब जाकर पुलिस किसी तरह शवों को कब्जे में ले सकी।
बहरिया क्षेत्र के दलीपुर गांव निवासी रामबरन यादव मुम्बई में आटोरिक्शा चलाते हैं। इन दिनों वह गांव आए हैं। रामबरन की बेटियां ममता (13) और रेखा (11) मैलहा स्थित सेठ गयादीन इंटर कालेज में पढ़ती थीं। ममता कक्षा सात और रेखा कक्षा छह की छात्रा थी। शनिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे वे दोनों एक ही साइकिल पर स्कूल जा रही थी। ममता साइकिल चला रही थी। रेखा पीछे बैठी थी। वीरगंज गांव के सामने वे दोनों बालू लादकर जा रहे ट्रक की चपेट में आ गईं। वे सड़क पर गिरीं तो ट्रक ने उन दोनों को रौंद दिया। पिछला पहिया उनके सिर को कुचलता निकल गया। दोनों बहनों की वहीं मौत हो गई। ग्रामीणों ने ट्रक घेरकर ड्राइवर और खलासी को दबोच लिया।
उनकी जमकर पिटाई कर दी। रेखा और ममता की मौत की खबर पाकर परिवार के लोग भी रोते-कलपते आ गए। बहरिया पुलिस ने आकर भीड़ से पिट रहे ट्रक ड्राइवर तथा खलासी को बचाने की कोशिश की तो उत्तेजित होकर लोग पुलिस से ही भिड़ गए। पुलिस ने लाठी भांजकर हटाने की कोशिश मगर वहां सैकड़ों लोग जुट गए थे। प्रभारी थानाध्यक्ष बृजेंद्र कुमार से जानकारी पाकर एसपी गंगापार राजेश श्रीवास्तव, सीओ फूलपुर रविशंकर प्रसाद, सीओ हंडिया मोईन अहमद, एसडीएम फूलपुर विकास कुमार सिंह, एसडीएम सोरांव बृजेंद्र द्विवेदी वहां पहुंच गए। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजा की मांग करते हुए चार घंटे तक सिकंदरा-बहरिया मार्ग पर जाम लगाए रखा। लगभग दो बजे एसडीएम फूलपुर ने मुख्यमंत्री राहत कोष से बीस लाख रुपये की सहायता राशि दिलवाने की संस्तुति करने का आश्वासन दिया और तत्काल दस हजार की सहायता राशि प्रदान की तो लोग शांत हुए। पुलिस ने दोनों बहनों के शवों को सीलकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ट्रक चालक और खलासी के खिलाफ मुकदमा लिखा गया है।