इलाहाबाद। स्पेशल टास्क फोर्स की इलाहाबाद यूनिट ने करीब एक दशक से फरार पचास हजार रुपये के इनामी दस्यु सरगना राधेश्याम मौर्या को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। उसे शनिवार सुबह पुलिस ने धूमनगंज इलाके में चौफटका के निकट घेरा और फायरिंग के बीच दबोच लिया। उसके पास बाइक, नगदी और पिस्टल मिली। डाकू को पुलिस ने अदालत में पेश किया जहां से उसे नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट के डीएसपी प्रवीण सिंह चौहान ने बताया कि उपनिरीक्षक अतुल कुमार सिंह को मुखबिर से सूचना मिली कि फतेहपुर और कौशाम्बी में डकैती, हत्या, अपहरण, फिरौती वसूली की तमाम वारदातों में शामिल रहा 50 हजार रुपये का इनामी दस्यू सरगना राधेश्याम मौर्या धूमनगंज इलाके में छिपा है। वह शनिवार भोर में कौशाम्बी की तरफ जाने वाला है। इस जानकारी पर एसटीएफ की टीम ने चौफटका के निकट भोर में पांच बजे ही घेराबंदी कर ली। धूमनगंज थाना प्रभारी एमएस देव को भी बुला लिया गया। करीब पौने छह बजे चौफटका की तरफ से एक बाइक आने पर मुखबिर ने इशारा किया कि वही फरार डाकू राधेश्याम मौर्या है।
पुलिस और एसटीएफ ने रोकने का प्रयास किया तो उसने बाइक मोड़ दी। हड़बड़ी में बाइक फिसलने पर वह गिरा तो पुलिस को पीछे आता देख फायर करते हुए भागने लगा। किसी तरह उसे घेरकर पुलिस टीम ने पकड़ लिया। उसके कब्जे से पिस्तल, कारतूस, करीब बारह हजार रुपये और बाइक जब्त कर ली गई। पकड़ा गया राधेश्याम मौर्या फतेहपुर में सुल्तानपुर घोष इलाके के ओरमहा गांव का रहने वाला है।
वह वर्ष 1989 से अपने भाई सीताराम मौर्या के साथ गिरोह बनाकर डकैती, हत्या, फिरौती के लिए अपहरण जैसी दो दर्जन से ज्यादा वारदात अंजाम दी। एक सिपाही रामसेवक की हत्या में भी उसका हाथ रहा। पुलिस का घेरा कसा तो वह फतेहपुर से भागकर छत्तीसगढ़, विलासपुर, रायपुर, अम्बिकापुर और रायगढ़ में फरारी काटता रहा। इन जिलों में वह छोटी-मोटी आपराधिक घटनाओं के अलावा मेलों में दुकान लगाकर गुजारा करता रहा। डीजीपी स्तर से राधेश्याम की गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया गया था।