बदमाश अधिवक्ता राजेश कुमार श्रीवास्तव को नौ मई को ही यानी वारदात से एक दिन पहले ही मारने की फिराक में थे। हालांकि उनकी प्लानिंग फेल हो गई और उन्हें अपना इरादा बदलना पड़ा। यह खुलासा पकड़े गए बदमाशों से पूछताछ के बाद एसटीएफ ने किया है। यह भी पता चला है कि हत्या की योजना एक महीने पहले से बनाई जा रही थी। साथ ही वारदात के चार दिन पहले ही बदमाश शहर आकर रेकी में जुट गए थे।
पुलिस के मुताबिक पकड़े गए बदमाशों ने पूछताछ में जो खुलासा किया, उससे साफ है कि वह अधिवक्ता को नौ मई को ही मारना चाहता थे। इस दिन तय समय पर पहले से बनाए गए प्लान के मुताबिक सभी अपनी-अपनी जगह पहुंच भी गए थे, लेकिन थोड़ी सी चूक होने की वजह से वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए। दरअसल पकड़े गए बदमाशों ने पुलिस को बताया है कि सात मई यानी वारदात से तीन दिन पहले ही शमशाद और दोनों शूटर विशाल विश्वकर्म व रईस शहर आ गए थे। यहां आकर तीनों जंक्शन के पास स्थित गुरुकृपा होटल में रुके। खास बात यह कि शूटरों ने यहां अपनी मूल आईडी प्रूफ का इस्तेमाल किया। कमरा विशाल की मूल आईडी प्रूफ दिखाकर लिया गया। इसके बाद आठ मई को रेकी करने के बाद तीनों ट्रेन से प्रतापगढ़ चले गए। योजना के मुताबिक नौ मई को ट्रैवेल एजेंसी से अर्टिगा कार बुक कर तीनों शहर पहुंचे और अपनी-अपनी जगह खड़े हो गए। हालांकि देर से पहुंचने के कारण शमशाद, जिसे दोनों शूटरों को लोकेशन देनी थी, अधिवक्ता को घर से निकलते नहीं देख पाया। नतीजतन उन्हें इरादा बदलना पड़ा और फिर तीनों उसी कार से प्रतापगढ़ लौट गए। इसके बाद 10 मई को फिर स्विफ्ट डिजायर कार से शहर आकर वारदात को अंजाम दिया और उसी कार से भाग निकले।
तीनों बदमाशों से पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि आठ मई को राजेश के घर से लेकर कचहरी तक और वहां से बचकर भागने के रास्तोें की रेकी की गई। शूटरों को राजेश को पहचनवाने की जिम्मेदारी शमशाद पर थी। इस दिन दोनों शूटर विशाल व रईस हनुमान मंदिर और शमशाद अधिवक्ता के घर के पास खड़ा हो गया। हालांकि वह उन्हें घर से निकलते हुए नहीं देख सका। इसके बाद तीनों मिले और कचहरी पहुंच गए।
एसटीएफ के मुताबिक, कचहरी पहुंचने के बाद शमशाद ने अधिवक्ता की मोटरसाइकिल दोनों शूटरों को दिखाई। वहां उनका बस्ता रखा था लेकिन वह मौजूद नहीं थे। हालांकि सामने ही एक बोर्ड लगा था जिस पर अधिवक्ता का मोबाइल नंबर लिखा था। शातिर शमशाद ने फौरन नंबर को अपने मोबाइल में सेव किया। इससे अधिवक्ता की फोटो उसके मोबाइल में दिखने लगी और यह फोटो दिखाकर ही दोनों शूटरों को अधिवक्ता को पहचनवाया।
एसटीएफ को पूछताछ में बदमाशों ने जो बातें बताई हैं, उसके मुताबिक इस सनसनीखेज वारदात की योजना वारदात से करीब एक महीने पहले बनी थी। 23 मई को अंजनी श्रीवास्तव के बुलाने पर शमशाद प्रतापगढ़ से शहर में रामबाग पहुंचा। वहां अंजनी ने उसे घनश्याम को मिलवाया। इसके बाद घनश्याम व अंजनी ने होटल मालिक प्रदीप जायसवाल का पूरा प्रकरण बताते हुए शमशाद से अधिवक्ता की हत्या करने को कहा। साथ ही इस काम के लिए उसे दो लाख रुपये दिए जाने की बात कही।