इनामी छात्रनेता अच्युतानंद उर्फ सुमित शुक्ला की जान का दुश्मन उसके जिगर का करीबी ही बन बैठा। दरअसल, मुख्य आरोपी आशुतोष मृतक का बेहद करीबी था। यहां तक कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान उसकी जीत में सुमित ने अहम भूमिका अदा की थी। ऐसे में जिसने भी इस वारदात के बारे में सुना, उसके होश उड़ गए।
सूत्रों की मानें तो भले ही सीएमपी छात्रसंघ चुनाव आशुतोष ने लड़ा हो लेकिन, परोक्ष रूप से मैदान में सुमित ही था। कई बार वह उसके पक्ष में चुनाव प्रचार करते नजर आया। आशुतोष के पक्ष में उसने छात्रों के बीच जाकर वोट मांगे तो सोशल मीडिया पर भी उसके पक्ष में वोटिंंग की अपील करता रहा। यहां तक कि सोशल मीडिया पर उसने कई बार आशुतोष को अपना छोटा भाई बताकर उसके पक्ष में वोट मांगे। उसके फेसबुक एकाउंट पर कई ऐसे पोस्ट हैं, जिनसे साबित होता है कि आशुतोष उसके कितना करीब था। यहां तक कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान उसने फेसबुक पर आशुतोष की फोटो भी पोस्ट की थी। पांच अक्तूबर को चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद उसने फिर आशुतोष की फोटो पोस्ट कर उसे जीत पर बधाई दी थी। बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जुटे छात्रों में भी इसी बात की चर्चा होती रही। छात्रों का कहना था कि आशुतोष अक्सर सुमित के साथ देखा जाता था। उधर, पुलिस सूत्रों की मानेें तो हाल ही में सुमित ने ही आशुतोष को पिस्टल भी मुहैया कराई थी। कुछ छात्र यह चर्चा भी करते सुने गए कि उसी पिस्टल से उस पर गोली चलाई गई।
तहरीर में परिजनों ने आरोप लगाया है कि सुमित पहले से बैठा था जहां आशुतोष ने आकर उसे गोली मार दी। हालांकि हॉस्टल सूत्रों की मानें तो पूरा घटनाक्रम कुछ और ही था। सूत्रों की मानें तो बुधवार रात पार्टी में सुमित के साथ ही आशुतोष व उसके साथी भी मौजूद थे। इसी दौरान सुमित के करीबी से डांस करने के दौरान हरिकेश का विवाद हो गया। दोनों के बीच विवाद बढ़ा तो हरिकेश के समर्थन में आशुतोष आ गया जो सुमित को नागवार गुजरा। उसने सभी को वहां से भगा दिया। देर रात सुमित ने फोन किया तो आशुतोष का मोबाइल स्विच ऑफ था। इसके बाद उसने हरिकेश को फोन किया और सभी को खाना खाने के लिए हॉस्टल बुलाया। इसके बाद वहां पहुंचते ही आशुतोष ने उसे गोली मार दी।