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जिंदगी की मुश्किलों से घिरे प्रतियोगी छात्र ने फांसी लगा ली

Thu, 12 May 2016 02:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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फतेहपुर से अफसर बनने का सपना संजोकर शहर के अल्लापुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आया छात्र हेमंत कैथलिक (22) जिंदगी की मुश्किलों से लड़ते-लड़ते निखरने के बजाय बिखर गया। मंगलवार रात उसने कमरे की कुंडी अंदर से बंद कर पंखे के चुल्ले से लटककर जान दे दी। बुधवार सुबह भाई उसे जगाने गया तो छात्र को फांसी के फंदे पर झूलते देख चीख पड़ा। सूचना पर जार्जटाउन पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव नीचे उतारा। कमरे से मिले सुसाइड नोट को पढ़कर वहां मौजूद लोगों के आंसू छलक आए। खबर पाकर घरवाले भी एसआरएन अस्पताल आ गए। 
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फतेहपुर में असोथर के सूबेदार का पुरवा गांव के शिव शंकर कैथलिक एफसीआई आगरा में नौकरी करते हैं। उनके दो बेटों में हेमंत कैथलिक कुछ साल पहले अफसर बनने का सपना लेकर शहर आया था। वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता था। तैयारी के लिए दो साल पहले वह दिल्ली में कोचिंग करने गया था। हेमंत के साथ उसका छोटा भाई उदय उर्फ विकास भी रहता है। जो सीएमपी से बीए की पढ़ाई कर रह रहा है। पिछले कुछ महीनों से हेमंत परेशान रहता था। मंगलवार रात उदय बगल के कमरे रहने वाले दोस्त के कमरे में सो गया। इधर हेमंत कमरे की कुंडी अंदर से बंद कर चद्दर का फंदा बना पंखे के चुल्ले से लटक गया। बुधवार सुबह उदय ने देखा चीख पड़ा। अन्य छात्र और पड़ोस  के लोग भी आ गए। सूचना पर चौकी प्रभारी अल्लापुर शुभनाथ साहनी पहुंचे। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो कमरे से सुसाइड नोट भी मिला। उधर हेमंत के मौत की खबर घरवालों को मिली तो कोहराम मच गया। घरवाले यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि हेमंत अब इस दुनिया में नहीं है। वहीं भाई की मौत से उदय गम में डूबा है। चौकी प्रभारी अल्लापुर शुभनाथ साहनी ने बताया कि छात्र के पास से सुसाइड नोट मिला है। वह कुछ परेशानियों से घिरा हुआ था। तनाव में उसने ऐसा कदम उठा लिया। 

भाई तुम हमेशा मम्मी-पापा को खुश रखना 
प्रतियोगी छात्र हेमंत ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं जिंदगी की परेशानियों से ऊब चुका हॅूं। अब इस जिंदगी से घुटन सी हो रही है। मैं खुद अपने आप से लड़ रहा था। जिंदगी की परेशानियां रुक नहीं रही हैं। मुझे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। मम्मी-पापा शायद आपको लग रहा है कि एक फैसले की वजह से ऐसा कर रहा हूं लेकिन ऐसा कतई नहीं है। अपने इस कदम के लिए खुद जिम्मेदार हूं। इसमें किसी का कोई दोष नहीं है। मुश्किलें सब पर आती हैं। कोई बिखर जाता है तो कोई निखर जाता है। भाई तुम मम्मी-पापा और परिवार का ध्यान रखना। उन्हें हमेशा खुश रखना। यह तुम्हारी जिम्मेदारी है। 
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