इलाहाबाद। जारी इलाके में छात्रा से रेप की कोशिश की घटना में पुलिस ने आरोपी को बचाते हुए क्रास केस लिखने का खेल किया तो ऐसा ही शहर के कर्नलगंज थाने की पुलिस भी कुछ दिन पहले कर चुकी है। ममफोर्डगंज की एक महिला ने अपने पड़ोसी और उसके ड्राइवर के खिलाफ अश्लील हरकत और छेड़खानी की रिपोर्ट कर्नलगंज थाने में दर्ज कराई तो पुलिस ने कुछ नहीं किया मगर दूसरे रोज उल्टे आरोपी की और से पीड़ित महिला के खिलाफ मारपीट और दलित उत्पीड़न का केस लिख लिया। महिला ने बुधवार को एसएसपी कार्यालय में पुलिस की करतूत की शिकायत की है।
ममफोर्डगंज में बीके बनर्जी मार्ग पर रहने वाली नीलिमा (नाम काल्पनिक) ने पांच अगस्त को 100 नंबर पर पुलिस को खबर दी कि अनुपम जैन की शह पर उसके कार ड्राइवर सुरेंद्र ने घर में घुसकर उनके साथ बदसलूकी और अश्लील हरकत की है। नीलिमा ने चार बार कंट्रोल रूम को फोन किया तब जाकर दो सिपाही आए मगर वे विरोध के चलते सुरेंद्र को गिरफ्तार नहीं कर सके। नीलिमा की शिकायत पर कर्नलगंज थाने में नामजद केस लिखा गया। मगर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। नीलिमा फीजियोथेरेपिस्ट हैं। दो साल पहले उनका ब्याह दिल्ली में हुआ है। वह कुछ समय पहले ही मायके आई हैं।
घटना के कई रोज बीतने के बाद भी जब आरोपी सुरेंद्र को पुलिस ने नहीं पकड़ा और वह नीलिमा को घूरता और अश्लील हरकत करता रहा तो उन्होंने कर्नलगंज पुलिस से फिर शिकायत की। मगर उन्हें थाने से चौंकाने वाली जानकारी मिली। नीलिमा को बताया गया कि उनकी रिपोर्ट लिखने के दूसरे रोज छह अगस्त को सुरेंद्र की तहरीर पर उनके खिलाफ भी कर्नलगंज थाने में मारपीट और दलित उत्पीड़न का केस दर्ज किया गया है। इसमें उनका भाई भी नामजद है। यह सुन नीलिमा स्तब्ध रह गईं।
महिलाओं की सुरक्षा के दावे करने वाली पुलिस की इस करतूत ने उन्हें निराश कर दिया। छेड़खानी और परेशान करने वाले शख्स को गिरफ्तार करने की बजाय उल्टा पुलिस ने पीड़ित पर ही मुकदमा लाद दिया। नीलिमा ने बुधवार को एसएसपी कार्यालय जाकर शिकायत प्रकोष्ठ में प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया कि पुलिस ने दबाव में उनके खिलाफ झूठी रिपोर्ट लिखी है। अब आरोपी की तरफ से उन पर छेड़खानी का केस वापस लेने का दबाव दिया जा रहा है। नीलिमा ने एसएसपी से फरियाद की है कि आरोपी को गिरफ्तार कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कराने के साथ ही झूठा मुकदमा वापस कराया जाए।
‘हां यह सच है कि छेड़खानी की पीड़िता के खिलाफ आरोपी की तरफ से दूसरे रोज रिपोर्ट लिखी गई थी। मगर दोनों ही एफआईआर की तफ्तीश की जा रही है। जांच में सच सामने आ जाएगा। इसी वजह से एफआईआर लिखने के बाद कार्रवाई नहीं की गई है।’
-सिद्धार्थ तोमर, इंस्पेक्टर कर्नलगंज