डायल 100 यानी पुलिस कंट्रोल रूम में मिलने वाली सूचनाओं पर तेजी से कार्रवाई के लिए नए सिरे से योजना बना ली गई है। इसके तहत लखनऊ में सेंट्रल मास्टर क्वार्डिनेशन सेंटर और सभी जिलों में लोकल क्वार्डिनेशन सेंटर बनाए जाएंगे। करीब 600 करोड़ रुपये की इस स्कीम के लागू होने के बाद लोगों को सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद पुलिस की मदद मिल सकेगी। शासन को इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
पीएचक्यू इलाहाबाद के एडीजी डॉ.सूर्यकुमार शुक्ला ने महसूस किया कि अभी कंट्रोल रूम में सूचना मिलने के बाद भी पुलिस का रेस्पांस टाइम ठीक नहीं है। लोगों की शिकायत रहती है कि पुलिस सूचना दिए जाने के बावजूद समय पर नहीं पहुंचती। ऐसे में एडीजी ने डायल 100 सिस्टम को और प्रभावी बनाने के लिए पिछले दिनों वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में विचार-विमर्श किया। तय किया गया कि डायल 100 सिस्टम को प्रदेश भर में लागू करने के लिए राजधानी लखनऊ में एक सेंट्रल मास्टर क्वार्डिनेशन सेंटर बनाया जाएगा जहां फोन कॉल, एसएमएस, वाट्स एप, फेसबुक या ई-मेल के जरिए मिलने वाली सूचनाओं को संबंधित जिले के क्वार्डिनेशन सेंटर को भेज दिया जाएगा।
फिर जनपदीय क्वार्डिनेशन सेंटर से थानों और चौकियों को अवगत कराकर शिकायत कर्ता को पुलिस की मदद पहुंचाई जाएगी। जिला पुलिस से मास्टर क्वार्डिनेशन सेंटर को भी की गई कार्रवाई के बारे में बताया जाएगा। वहां देखा जाएगा कि पुलिस का सूचना मिलने के बाद रेस्पांस टाइम क्या रहा। कितनी देर में कार्रवाई की गई। जिलों में पुलिस कंट्रोल रूम से इतर बनने वाले क्वार्डिनेशन बनाया जाएगा। साथ ही थानों में पहले से मौजूद वाहनों के अलावा एक-एक फोर व्हीलर और एक बाइक दी जाएगी।
इन गाड़ियों में आधुनिक उपकरणों के अलावा मास्टर डाटा टेक्निक सिस्टम (एमडीटी) लगा होगा जिससे वाहनों की लोकेशन क्वार्डिनेशन सेंटर में कंप्यूटर सिस्टम पर देखा जा सकेगा। इस पूरी हाइटेक सिस्टम को तैयार करने में करीब 600 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एडीजी के जनसंपर्क अधिकारी सीपी पांडेय ने बताया कि पीएचक्यू से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। उम्मीद है जल्द अनुमति मिल जाएगी।