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दो बच्चों की जान बचाई, मगर हाथ से फिसल गया लाल

Sat, 14 Jul 2018 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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जिसकी आशंका थी, वही हुआ। 11 जुलाई की रात सलोरी में स्कूल की चहारदीवारी गिरने के बाद पानी के बहाव में लापता हुए मासूम शिखर का शव शुक्रवार सुबह शुक्ला मार्केट के आगे नाले में तैरता मिला। स्थानीय निवासियों ने शव मिलने की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने शव बाहर निकलवाया। जानकारी मिलते ही शिखर के घरवाले भी पहुंचे। दो दिन तक पानी में पड़े रहने से शव फूल गया था। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए शव भिजवा दिया। देर शाम आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शिखर के डूबने से मौत की पुष्टि हुई है हालांकि, उसके बाएं पैर की हड्डी में फैक्चर भी मिल है।
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उधर, पोस्टमार्टम के बाद शिखर का शव ओमगायत्री नगर स्थित घर लाया गया। शव पहुंचते ही घर में रोना-पिटना मच गया। शिखर की मां चंद्रा रोते-रोते बेसुध हो गई। बहनें भी बिलखती रहीं। शिखर के स्कूल के कपड़े घर के बाहर अभी तक सूखने को पडे़ थे। बहन उससे लिपटकर रो रहीं थी। गाजियाबाद में बतौर मजिस्ट्रेट तैनात चंद्रा के देवर बृजेश सिंह और भदोही उपभोक्ता फोरम में सदस्य उनके जेठ जर्नादन सिंह भी पहुंच गए। पहले अनिकेत और अब शिखर का शव देखकर मोहल्ले के लोग भी गमजदा दिखलाई पड़े। परिवार वालों को रोते-बिलखते देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। बारह साल का शिखर अभी बीबीएस स्कूल में सातवीं का छात्र था। वही मां चंद्रा की जिंदगी का आधार था। पति पति जयप्रकाश की करीब दो साल पहले मृत्यु हो चुकी है।  

उस दिन की घटना लोगों के जेहन में ताजा है। घटना के वक्त वहां मौजूद जयचंद्र वर्मा बताते हैं कि शिखर की मां हादसे के वक्त घर के बाहर दरवाजे पर खड़ी थीं। वह उनसे थोड़ा पीछे थे। अचानक तेज आवाज के साथ पानी का तेज बहाव ईंटों के साथ गली की ओर आया। जब तक लोग कुछ समझ पाते तभी एक साथ चार लड़के उसमें बहते दिखाई पड़े। चंद्रा ने तुरंत फुर्ती दिखाई और दो लड़कों को बिना देरी किए बाहर घसीट लिया। शिखर भी चंद्रा को दिखा लेकिन, जैसे ही उसने हाथ बढ़ाया, शिखर फिसलकर आगे निकल गया। यह पूरी घटना कुछ सेकेंडों के भीतर घट गई। कुछ पल बाद ही चंद्रा को अहसास हो गया कि उसका लाल पानी में बह गया है। चंद्रा ने मदद की गुहार लगाई मगर तब तक शायद देर हो चुकी थी।
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ओमगायत्री नगर स्थित विकास स्कूल, हरिजन आश्रम की बाउंड्रीवाल के बारिश के बीच अचानक ध्वस्त हो जाने से स्कूल प्रबंधन समेत ठेकेदार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ध्वस्त हुई दीवार को देखने से साफ पता चलता है कि करीब अस्सी फीट लंबी और नौ फीट ऊंची इस दीवार को बनवाने में हद दर्जे की लापरवाही बरती गई। पिछले वर्ष इसकी मरम्मत हुई लेकिन, फिर भी इसकी मजबूती की कोई चिंता नहीं की गई। इतनी लंबी दीवार बिना किसी सरिया और पिलर के बना दी गई। नतीजतन यह दीवार पानी का दबाव नहीं सह पाई और ध्वस्त हो गई। इससे दो बच्चों की मौत हो गई जबकि, दो बच्चे गंभीर रुप से घायल हो गए थे।

समाज कल्याण विभाग से संचालित होने वाले इस विद्यालय के प्रबंध तंत्र का जिलाधिकारी पदेन अध्यक्ष है जबकि, सचिव के नाते जिला समाज कल्याण अधिकारी विद्यालय के कार्य संचालित करते हैं। विद्यालय के पीछे स्थित ओमगायत्री नगर मोहल्ले को अलग करने के लिए वहां दीवार बनी है लेकिन ऊंचाई कम होने पर तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार के कार्यकाल में पिछले वर्ष उसकी मरम्मत कराई गई। यह काम एक संस्था के मार्फत कराया गया। मरम्मत कार्य पर तीन लाख रुपये खर्च किए गए लेकिन, कार्य गैर-जिम्मेदारी से कराया गया। यह दीवार करीब अस्सी फीट तक लंबी है मगर इसमें एक भी सरिया का इस्तेमाल नहीं हुआ है। अमूमन लंबी दीवार की मजबूती के लिए बीच में पिलर्स का निर्माण कराया जाता है लेकिन, इसमें कोई भी पिलर नहीं बनाया गया। इसी वजह से बुधवार को जब ग्राउंड पर भरे पानी का दबाव दीवार पर बढ़ा तो दीवार दबाव नहीं झेल सकी। उधर, प्रधानाचार्य एनके द्विवेदी अभी भी इसे विद्यालय की लापरवाही नहीं मनाते। उनका कहना है विद्यालय के गहराई में होने से आसपास के इलाके का पूरा पानी यहां भरता है। इसकी शिकायत की गई लेकिन, सुनवाई नहीं हुई।

शिखर की मां चंद्रा सिंह एवं अनिकेत के पिता घनश्याम गुप्ता की तहरीर पर कर्नलगंज पुलिस ने विकास विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक के पद नाम पर आईपीसी की धारा-304-ए के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है। मां चंद्रा सिंह ने पुलिस को सौंपी तहरीर में सीधे प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने है कि कहा पूर्व में भी दीवार गिर चुकी है लेकिन, जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था। उन्होंने नगर निगम एवं एडीए पर भी लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उनको भी गैर जिम्मेदार ठहराया है। इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह के मुताबिक मुकदमा दर्ज करके मामले की पड़ताल की जा रही है।  

विकास स्कूल के बांउड्री ढहने के मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी ने जांच शुरू कराई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रवीण सिंह ने माना कि  बाउंड्री काफी पुरानी और कमजोर थी। उसमें पिलर नहीं थे फिर भी उसकी ऊंचाई बढ़ाई गई। कहीं से जल निकासी की व्यवस्था भी नहीं थी।
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