एसआरएन अस्पताल से शुक्रवार भोर में हत्या का आरोपी अंबुज तिवारी नैनी सेंट्रल जेल के सिपाहियों को गच्चा देकर भाग निकला। अंबुज सुबह टॉयलेट के लिए गया और भीतर से दरवाजा बंद कर पाइप से उतर कर फुर्र हो गया। सिपाहियों की नजर उस पर पड़ी भी लेकिन वह अंधेरे का फायदा उठाकर गुम हो गया। दिन में ही प्रधान बंदी रक्षक तालेवर प्रसाद ने कोतवाली थाने में अंबुज के खिलाफ भागने और सिपाही उपेंद्र सिंह तथा नरेंद्र कुमार के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज करवा दिया।
दारागंज में कच्ची सड़क के रहने वालेे अंबुज, उसके पिता रमेश तिवारी और दोस्त को जार्जटाउन के अल्लापुर के रहने वाले शिवांश प्रताप उर्फ मुकुंद (15) की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। शिवांश की हत्या करने के बाद अंबुज ने शव को मध्य प्रदेश में सोहागी की पहाड़ियों में छिपा दिया गया था। मुकुंद कोचिंग जाते वक्त लापता हुआ था। पुलिस ने शिवांश का कंकाल बरामद किया था। बाप-बेटे तभी से जेल में हैं। अंबुज की तबीयत 10 दिसंबर की रात बिगड़ गई थी। उसे डायबिटीज की शिकायत है। बेहोश होने पर जेल अस्पताल से उसे एसआरएन के लिए रेफर कर दिया गया। उसे अस्पताल की पहली मंजिल पर मेडिसिन की आईसीयू में भर्ती किया गया था।
उसकी सुरक्षा में उपेंद्र और नरेंद्र लगाए गए थे। सुबह चार बजे अंबुज ने कहा कि उसे टॉयलेट जाना है। सिपाही उसे टॉयलेट ले गए। भीतर से उसने दरवाजा बंद कर लिया। कुछ देर बाद वह बाहर नहीं आया तो सिपाहियों को चिंता हुई। दरवाजे को धक्का मारकर खोल गया तो रोशनदान खुला मिला। झांका तो पाइप के सहारे अंबुज उतरता हुआ दिखाई दिया। सिपाही सीढ़ी से दौड़ते हुए नीचे आए लेकिन तब तक वह गुम हो चुका था। सुबह ही नैनी जेल को खबर दे दी गई। अंबुज मूलरूप से कौशांबी के महेवा घाट का रहने वाला है।