झूंसी में अपनी साइट देखकर सोमवार देर शाम मौसेरे भाई के साथ शहर में घर लौट रहे रेलवे ठेकेदार प्रताप सिंह (40) की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। गोली मारने वाले तीन बदमाश पहले से सड़क किनारे बाइक लेकर खड़े थे। कार पास आने पर उनमें से एक बदमाश ने रुकने का इशारा कर लिफ्ट मांगी। फिर पिस्टल से गोलियां बरसाकर साथियों संग भाग निकला। मौसेरे भाई से सूचना पाकर आए करीबियों ने घायल ठेकेदार को अस्पताल पहुंचाया मगर उसकी मौत हो चुकी थी। स्थानीय पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच ने कातिलों की तलाश शुरू कर दी है।
प्रताप सिंह का मकान सिविल लाइंस में क्लाइव रोड पर लाल गिरजाघर के निकट है। पिता नंद किशोर का निधन हो चुका है। वह दो भाइयों में छोटा था। बड़े भाई प्रवीण मिलेट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) में ठेकेदारी करते हैं। परिवार में पत्नी मेघा और एक बेटा श्रेष्ठ है। इस वक्त प्रताप ने झूंसी रेलवे स्टेशन पर काम ले रखा था। उसने कौशाम्बी में महेवा घाट निवासी अपने मौसेरे भाई पूर्व प्रधान रवींद्र सिंह को साइट का काम देखने के लिए साथ रखा था। सोमवार शाम प्रताप झूंसी में साइट पर गया था। देर शाम करीब सात बजे वह रवींद्र के साथ अपनी स्विफ्ट डिजायर कार में वापस लौट रहा था। वह कार चला रहा था जबकि रवींद्र बगल में बैठा था। घटना के चश्मदीद रवींद्र के मुताबिक, कार झूंसी रोडवेज वर्कशाप के निकट पहुंची तो सड़क किनारे पल्सर बाइक के साथ तीन लोग खड़े दिखे। एक युवक बाइक पर इस तरह झुका था जैसे उसमें आई खराबी सुधार रहा हो। उनमें एक युवक ने हाथ से इशारा दिया तो प्रताप ने कार रोक दी। उस युवक ने पास आकर कहा- हमें भी लेते चलो। इसके बाद उसने पिस्टल तानकर प्रताप पर फायरिंग कर दी। तीन गोलियां प्रताप के दाहिने हाथ और एक सीने में लगी। गोलियां मारकर हमलावर अपने दो साथियों संग बाइक पर भाग गया।
हमले से घबराए रवींद्र ने प्रताप के मोबाइल से फौरन रिश्तेदार को फोन किया। घायल प्रताप को पहले बालसन चौराहा के निकट निजी हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां से हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने जवाब दिया तो एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। वहां उसे मृत बताया गया तो कोहराम मच गया। कुछ देर बाद क्राइम ब्रांच प्रभारी जेपी राय भी पुलिस के साथ पहुंच गए। फिलहाल कातिलों का सुराग नहीं लग सका है। पुलिस जांच कर रही है कि इस घटना का ताल्लुक तीन साल पहले पुलिस लाइन के सामने ठेकेदार पिंकी गुप्ता हत्याकांड से तो नहीं जिसमें प्रताप चश्मदीद गवाह था।