फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

करोड़ों के सिपाही भर्ती घोटाले में पूर्व विशेष सचिव को नोटिस

Sun, 25 Mar 2018 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
2013 में हुई सिपाही भर्ती घोटाले की जांच में फिर तेजी आ गई है। जांच मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने अब मामले में तत्कालीन विशेष सचिव समेत कुल 32 लोगों को नोटिस जारी किया है। पूछताछ के लिए उन्हें एक हफ्ते के भीतर क्राइम ब्रांच के समक्ष उपस्थित होना होगा। बता दें कि दर्जनों फेल अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर उनसे पांच-पांच लाख रुपये ऐंठ लिए गए थे। आरोप है कि भर्ती माफिया ने पुलिस विभाग के कुछ लोगों से सांठगांठ करके तत्कालीन विशेष सचिव गृह के फर्जी लेटर पैड पर इन अभ्यर्थियों के सत्यापन और प्रशिक्षण पर भेजने का फर्जी आदेश भी जारी कर दिया था।
विज्ञापन


मामला 2013 की सिपाही भर्ती का है। अमोलवा फूलपुर के लालजी सिंह समेत पांच लोगों ने आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री स्वाति समेत दर्जनों लोगों से सिपाही भर्ती परीक्षा में पास कराने के नाम पर पांच-पांच लाख रुपये ऐंठे गए थे। आरोप था कि व्हाइटनर का प्रयोग करने के कारण उपरोक्त अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम रोक दिया गया था। फरवरी 2016 में जौनपुर निवासी गुलाबचंद यादव, फूलपुर में रहने वाले प्रभाशंकर यादव और रामचंद्र यादव व आजाद उर्फ रियाजुद्दीन निवासी सरायममरेज ने भुक्तभोगियों और उनके परिवारवालों से संपर्क किया। कहा कि पांच लाख रुपये देने पर वह उन्हें परीक्षा में पास करा देंगे।

उनकी बातों में आकर दर्जनों लोगों ने उन्हें रुपये दिए तो आरोपियों ने फर्जी नियुक्ति पत्र भी थमा दिया। हालांकि नौकरी नहीं मिली। भुक्तभोगियों की शिकायत पर मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। हालांकि कई महीनों तक कार्रवाई नहीं हुई। मौजूदा एसपी क्राइम बृजेश कुमार मिश्र की तैनाती के बाद जांच में तेजी आई और 04/08/17 को क्राइम ब्रांच की ओर से फूलपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
विज्ञापन


आरोप है कि मामला दर्ज होने के बावजूद फूलपुर थाने के पुलिसकर्मियों ने मामला दबाए रखा। इसकी शिकायत शासन से की गई जिस पर करीब 10 दिन पहले मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। सूत्रों की मानें तो जांच मेें कई चौंकाने वाली बातें सामने आई है। पता चला है कि भर्ती माफिया ने तत्कालीन विशेष सचिव गृह सूर्यनारायण शुक्ला के फर्जी लेटर पैड पर उपरोक्त अभ्यर्थियों के सत्यापन और प्रशिक्षण पर भेजने का आदेश भी जारी कर दिया।

बाद में जानकारी पर तत्कालीन विशेष सचिव ने लेटर पैड को फर्जी बताया था। सूत्रों की मानें तो मामले में पुलिस कार्यालय के कुछ तत्कालीन कर्मियों की मिलीभगत की भी बात सामने आई है। इसलिए क्योंकि बिना किसी पूछताछ के उन्होंने आननफानन में उपरोक्त अभ्यर्थियों का सत्यापन कराकर शासन को भेज दिया। इसके बाद ही मामले का खुलासा हुआ। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर क्राइम बांच की ओर से तत्कालीन विशेष सचिव समेत कुल 32 लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

जांच की जरूरत भी नहीं समझी
सूत्रों की मानें तो आरक्षियों की भर्ती के संबंध में सत्यापन व प्रशिक्षण पर भेजने संबंधी आदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड जारी करता है। यह जानते हुए भी पुलिस कार्यालय के तत्कालीन कर्मचारियों ने पूछताछ की जरूरत नहीं समझी। आननफानन में सत्यापन कराकर फाइल शासन को भेज दी गई। पुलिस कार्यालय के तत्कालीन कर्मचारियों की यह तेजी भी उन्हें सवालों के घेरे में खड़ी करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें