मेजा/फूलपुर/बरौत (इलाहाबाद)। कम उपज के गम में तीन और किसानों ने शुक्रवार को दम तोड़ दिया। औपचारिकता पूरी करते हुए तहसील प्रशासन की तरफ से मौके पर लेखपालों को भेजा गया। पीड़ित परिवारों को कोई आर्थिक राहत मिलेगी या नहीं, अफसर भी यह बता पाने की स्थिति में नहीं हैं। घटना मेजा, फूलपुर और हंडिया तहसील की है, जहां तीनों किसानों कि मौत खेत में फसल की कटाई-मड़ाई के दौरान हुई।
फूलपुर तहसील में कपसा गांव किसान चिंतामणि यादव (62) की तीसरी और सबसे छोटी बेटी प्रतिमा की शादी अगले महीने तय है। उन्होंने तीन बीघा खेत में गेहूं की बुआई की थी। परिवार वालों से कहा करते थे कि फसल बेचकर बिटिया की शादी करेंगे लेकिन वक्त आने से पहले कम उपज के गम ने उनकी जान ले ली। चिंतामणि शुक्रवार सुबह खेत पर मड़ाई के लिए पहुंचे। कम पैदावार देख सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके और गश खाकर वहीं गिर पड़े। गांव वाले उन्हें अस्पताल लेकर भागे लेकिन रास्ते ही उन्होंने दम तोड़ दिया। पति की मौत से पत्नी प्रभावती देवी बेसुध हो गई हैं। वहीं, मेजा तहसील में सिंगारो गांव के एक किसान ने भी कम पैदावार के सदमे से दम तोड़ दिया।
किसान नेब्बू लाल (64) के पास एक बीघा खेत है। बृहस्पतिवार रात वह पत्नी अनारकली के साथ खेत में गेहूं की फसल की मड़ाई कर रहे थे। एक बीघा में महज 12 किलो पैदावार देख वह सन्न रह गए। नेब्बू लाल के तीन पुत्र हैं। परिवार का भरण-पोषण खेती पर ही निर्भर करता है। नेब्बू लाल ने थोड़ा बहुत खेत बंटाई पर भी लिया था। हर तरफ से खुद और परिवार को मुसीबत से घिरा देख वह सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके और खेत में ही उनकी जान निकल गई। दोनों ही मामलों में तहसील प्रशासन ने मौके पर लेखपालों को जांच के लिए भेजा लेकिन यह खानापूरी तक ही सीमित रहा। फौरी तौर पर पीड़ित परिवारों को एक रुपये की मदद भी मुहैया नहीं कराई गई।
हंडिया तहसील में अहिरी गांव के किसान बुद्दूराम (50) के पास दो बीघा खेत है। परिवार वालों को पेट पालने के लिए उन्होंने अलग से तीन बीघा बंटाई पर लिया था। बारिश से फसल चौपट हो चुकी थी। बालियों से गेहूं गायब था और कटाई-मड़ाई के लिए कोई तैयार नहीं था। बुद्दूराम के बच्चों ने शुक्रवार को किसी तरह से एक ट्रैक्टर का इंतजाम किया और अपने पिता से साथ खेत में फसल की कटाई के लिए पहुंचे। कटाई शुरू होते ही बुद्दूराम ने बालियां हाथ में लेकर देखीं तो उनमें से गेहूं नदारद था। वह यह सदमा बर्दाश्त नहीं सके और दिल का दौरा पड़ने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
किसान गजेंद्र सिंह की मौत के मुद्दे पर कांग्रेसियों ने शुक्रवार को महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पोस्टर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव मुुकुंद तिवारी और शहर कांग्रेस के पूर्व महासचिव राजकुमार सिंह ने मामले की सीबीआई जांच कराने और किसान गजेंद्र सिंह के मृत्यु स्थल को स्मारक बनाकर एक प्रतिमा लगाए जाने की मांग की। इस दौरान पार्टी नेता लाल बाबू साहू, आशुतोष पांडेय, राजेंद्र मिश्र, गुलाम जिलानी, अजय श्रीवास्तव, श्रीश चंद्र दुबे, शंभूनाथ रावत आदि मौजूद रहे।
सपाइयों ने शुक्रवार को सपा के जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति सिंह यादव के नेतृत्व में डीएम से मिलकर किसानों को मुआवजा वितरण तत्काल शुरू कराए जाने की अपील की। डीएम ने उन्हें बताया कि अब तक 5759 किसानों को तीन करोड़ 57 लाख 88 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जा चुके हैं। इसके अलावा एक अरब 65 करोड़ 78 लाख 82 हजार 400 रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
तहसील सदर के लिए कुल तीन करोड़ 73 लाख 93 हजार 700 रुपये, सोरांव के लिए 15 करोड़ 70 लाख, 72 हजार 500, फूलपुर के लिए 19 करोड़ चार लाख 85 हजार, हंडिया के लिए तीन करोड़ 40 हजार 200, करछना के लिए 18 करोड़ पांच लाख 81 हजार 400, बारा के लिए 19 करोउ़ 44 लाख 58 हजार 400, मेजा के लिए 18 करोड़ 34 लाख 38 हजार 600 और कोरांव के लिए सर्वाधिक 41 करोड़ 40 लाख 50 हजार 800 रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।