इलाहाबाद। दस रोज पहले लिच्छवी एक्सप्रेस में डाका डालकर लूटपाट करने वाले गिरोह के चार बदमाशों को रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जीआरपी ने औरेया जिले के इन चार बदमाशों को गिरफ्तार कर तमंचा, चाकू, लूटे गए गहने, नगदी और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस ने बताया कि गिरोह के दो बदमाशों की तलाश हो रही है। लूटपाट का शिकार हुए दो लोगों ने जीआपी थाने में पकड़े गए बदमाशों की पहचान भी की।
आनंद बिहार (दिल्ली) से सीतामढ़ी जा रही लिच्छवी एक्सप्रेस में 23 अप्रैल की रात बमरौली से सूबेदारगंज के बीच डकैती पड़ी थी। रात करीब दो बजे बजे छह बदमाशों ने महिला और विकलांग कोच में घुसकर लूटपाट शुरू की। विरोध पर एक यात्री ममता के गले पर चाकू से वार कर दिया जिससे वह लहूलुहान हो गई। बदमाशों ने दोनों कोच में महिला-पुरुष यात्रियों को आतंकित कर नगदी, गहने, मोबाइल फोन लूट लिए। महिलाओं को धमकाकर उनके शरीर से गहने उतार लिए। लूटपाट के बाद सभी बदमाश सूबेदारगंज स्टेशन के निकट धीमी रफ्तार से चल रही ट्रेन से उतरकर भाग गए थे। वारदात को चुनौती की तरह लेते हुए सीओ रेलवे ओपी सिंह ने बदमाशों की धरपकड़ पर पूरी ताकत झोंक दी थी। आखिरकार बदमाशों का पता चल गया।
चार बदमाशों को दबोच लिया गया। सीओ ओपी सिंह ने रविवार दोपहर गिरफ्तार बदमाशों को जीआरपी थाने में मीडिया के सामने पेश किया। गिरफ्तार बदमाशों में सत्यप्रकाश गुप्ता उर्फ सिस्टम, राजा सक्सेना उर्फ भुर्जी, आकाश धोबी, बंटू बाथम शामिल हैं। ये सभी औरेया जनपद में दिबियापुर कस्बे के रहने वाले हैं। इनमें सत्यप्रकाश गुप्ता उर्फ सिस्टम गैंग का सरगना है। गिरफ्तार बदमाशों के कब्जे से एक तमंचा, कारतूस, तीन चाकू, छह मोबाइल फोन, सोने-चांदी के जेवर, बाइस सौ रुपये नगद बरामद किए गए हैं। गैंग के दो बदमाशों की तलाश की जा रही है। सीओ ने बताया कि इंस्पेक्टर वशिष्ठ सिंह यादव ने एसएसआई शंभूदयाल मौर्या, सिपाहियों शत्रुघ्न पांडेय, इरशाद अली, प्रमोद कुमार, सर्विलांस सेल के सिपाहियों सदानंद और राजुकमार सोनकर की मदद से इन बदमाशों को पब्लिक पुल के नीचे पुराने केबिन से गिरफ्तार किया। एडीजी रेलवे ने बदमाशों की जल्द गिरफ्तारी पर जीआरपी टीम की सराहना की जबकि एसपी रेलवे ने टीम के लिए पांच हजार रुपये पुरस्कार की घोषणा की।
इस वारदात में खास बात यह कि गिरोह के सभी छह बदमाशों ने पहली बार कोई वारदात की है। दरअसल ये सभी कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर चना-छोला बेचकर गुजारा करते थे। गिरोह के सरगना सत्यप्रकाश गुप्ता उर्फ सोनू उर्फ सिस्टम उर्फ कल्लू ने घटना अंजाम देने से तीन रोज पहले योजना तैयार की। इसकी खातिर कानपुर परेड से दो-दो सौ रुपये में पांच चाकू खरीदे गए। बंटू बाथम के पास तमंचा था, जिसे उसने गैंग सरगना सोनू को दिया। घटना वाली रात वे सभी कानपुर सेंट्र्ल से लिच्छवी के जनरल कोच में बैठ गए।
इस ट्रेन में जीआरपी या आरपीएफ का एस्कार्ट नहीं होता इसलिए इसी ट्रेन को डकैती के लिए चुना। सोनू उर्फ सिस्टम ने सीओ के सामने कहा कि वह तो चना-छोला बेचकर गुजारा करता था, लेकिन जीआरपी ने बार-बार उसे फर्जी ढंग से अवैध वेडिंग में गिरफ्तार कर जेल भेजा। जिसकी वजह से उसे गुजारे के लिए ऐसा करना पड़ा। इस गिरोह तक पहुंचने में पुलिस के लिए मोबाइल फोन की सर्विलासिंग से काफी मदद मिली। पुलिस ने सैकड़ों मोबाइल कॉल की निगरानी की।