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कन्हैया ने थाने में ही निगला था सल्फाश

Wed, 01 Mar 2017 01:50 AM IST
अंकुर त्रिपाठी/अभिषेक तिवारी, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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रास्ते के विवाद में गई महिला की जान - फोटो : demo pic
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कन्हैया कोल ने खीरी थाने में पुलिस कस्टडी में ही जहर निगला था। घरवालों ने पुलिस से मिले पैसों के लालच और डर की वजह से थाने में लिखकर दिया कि कन्हैया ने घर में जहर खाया, लेकिन अमर उजाला से बातचीत में उसके भाई और मौसा ने पूरा सच बयान कर दिया। उन्होंने बताया कि कन्हैया ने शनिवार शाम ही थाने में जहर की गोलियां खा ली थीं। हालत बिगड़ने पर रात में उसके भाई को फोनकर थाने बुलाया और सौंपने के साथ ही जीडी में दस्तखत करा लिया कि वह सही सलामत है। थानेदार ने भाई और मौसा को चुप रहने के लिए दो बार में 17 हजार रुपये दिए और पांच लाख रुपये सरकार से दिलाने का भरोसा भी दिया।
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सुजनी गांव निवासी कन्हैयालाल कोल (26) कुछ महीने पहले एक विवाहित महिला को भगा ले गया था। शुक्रवार को लौटने पर महिला के घरवालों द्वारा हमला किए जाने पर उसने 100 नंबर पर फोन किया तो पुलिस उसे खीरी थाने ले गई। शनिवार रात मौसा मथुरा और भाई अर्जुन उसे थाने से लेकर निकले तो जहर खाने से कन्हैया की हालत बिगड़ी और एंबुलेंस में अस्पताल लाते वक्त जाम में फंसने की वजह से उसकी सांस थम गई। रविवार को मौसा और भाई ने मीडिया को बताया था कि थाने से निकलते ही कन्हैया बेहोश होकर गिर गया था मगर पुलिस कहती रही कि उसने घर जाने के बाद जहर खाया। इसमें पुलिस का लेना-देना नहीं है। सोमवार और मंगलवार को अमर उजाला से बातचीत में कन्हैया के मौसा और भाई ने घटनाक्रम की हकीकत और पुलिस की करतूत के बारे में बताया।

पीआरडी (प्रांतीय रक्षक दल) में तैनात मौसा मथुरा के अनुसार, शनिवार रात करीब नौ बजे अर्जुन ने उसे बताया कि थाने से फोन पर कहा गया कि कन्हैया को आकर ले जाओ। वे दोनों थाने गए। अर्जुन से जीडी में दस्तखत करा लिया गया कि कन्हैया को सही सलामत उन दोनों को सौंपा गया है। मगर थाने से निकलकर कुछ ही दूर जाने पर कन्हैया उल्टियां करने लगा। अस्पताल ले जाते वक्त जाम में एंबुलेंस फंसने में उसकी मौत हो गई। मामला मीडिया में आया तो खीरी पुलिस ने सोमवार को अर्जुन से यह लिखाकर ले लिया कि कन्हैया ने घर जाकर जहर खाया था। साथ ही मौसा मथुरा को थानाध्यक्ष तारकेश्वर राय ने सात हजार रुपये दिए। मंगलवार को भी भाई अर्जुन और अनिल को थाने बुलाकर थानाध्यक्ष ने दस हजार रुपये और दिए। उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि सरकार से पांच लाख रुपये दिलाया जाएगा।
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मौसा मथुरा ने बताया कि अर्जुन को उल्टियां होने लगीं तो उसे वापस थाने ले गए, लेकिन पुलिसवालों ने कह दिया कि जीडी में लिखकर सुपुर्दगी कर दी गई है इसलिए अब पुलिस कुछ नहीं कर सकती। मथुरा के मुताबिक, इसके बाद उसने बाइक पर घर जाकर पैसों का इंतजाम किया। फिर अर्जुन को निजी चिकित्सालय और  कोरांव सीएचसी ले गए, जहां से शहर भेज दिया गया। मथुरा के बयान से साफ है कि जहर खाने से कन्हैया की जान पर खतरा मंडरा रहा था तब भी पुलिस ने उसे मौसा और भाई के हवाले कर पल्ला झाड़ लिया। उसे दोबारा थाने ले जाने पर भी पुलिसवालों ने इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की बजाय टरका दिया, क्योंकि उन्हें कन्हैया की जान बचाने से ज्यादा अपनी गर्दन बचाने की चिंता थी। पुलिसवालों ने जान तो बचाई नहीं बल्कि घटना की लीपापोती करने की कोशिश में लगे हैं।

मौसा मथुरा के मुताबिक, थाने से निकलने के बाद वह बाइक में पेट्रोल भराने चला गया। कन्हैया के साथ अर्जुन था। वह कुछ मिनट बाद लौटा तो देखा कि कन्हैया सड़क पर पड़ा उल्टियां कर रहा है। उसने ही बताया कि मैंने थाने में सल्फाश खा लिया है। मुझे अब नहीं जीना है। मथुरा के मुताबिक, महिला के साथ लौटने पर जब कन्हैया पर गांव और महिला के घरवाले हमलावर हुए तभी उसने जहर खरीदकर रख लिया था। खीरी थाने में पुलिसवालों ने तलाशी ली होती तो जहर बरामद हो सकता था। कन्हैया पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर था। सबसे बड़ा भाई अर्जुन है। मां शिवराजी बीमार है, जबकि पिता शिवलखन का निधन हो चुका है।
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(अमर उजाला के पास भाई और मौसा से फोन पर बातचीत की रिकार्डिंग है)
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