मंसूराबाद/कौड़िहार (इलाहाबाद)। परिवार के लोगों ने डॉक्टर बनने का ख्वाब पूरा करने से रोका तो उदास होकर छात्रा उषा ने ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। वह परिवार के लोगों के साथ कानपुर से यहां नवाबगंज में अपने दादा के घर आई थी। मंगलवार रात किसी वक्त वह घर से निकलकर रेलवे ट्रैक की ओर चली गई। बुधवार सुबह ट्रैक पर ट्रेन से कटी उसकी लाश देख लोगों ने बताया तो घर में हाहाकार मच गया।
नवाबगंज के पारसपुर भगदेवरा गांव निवासी पन्नालाल परिवहन विभाग कानपुर के वर्कशाप में बतौर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। वह पत्नी-बच्चों संग कानपुर में ही रहते हैं। परिवार में पत्नी निर्मला, दो बेटी और दो बेटे हैं। दो बेटियों में बड़ी सुशीला की शादी हो चुकी है। छोटी उषा (20) कानपुर विश्वविद्यालय से बीएससी के बाद अब एमए की पढ़ाई कर रही थी। कुछ दिन पहले पन्नालाल पत्नी और बच्चों के साथ यहां अपने पैतृक घर आ गए थे।
बुधवार सुबह परिवार के लोग सोकर उठे तो बेटी उषा नदारद थी। घर और पड़ोस में भी उसका पता नहीं चला। फिर खबर मिली कि भवानीपुर गांव के सामने रेलवे ट्रैक पर किसी लड़की का शव पड़ा है। गांव और परिवार वाले वहां पहुंचे तो लाश उषा की थी। परिजन सन्न रह गए। खबर पाकर नवाबगंज थाने की पुलिस भी पहुंच गई। परिजनों से बातचीत में पुलिस को पता चला कि उषा बीएससी के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करना चाहती थी। उसका ख्वाब डॉक्टर बनने का था मगर पिता ने आर्थिक समस्या का हवाला देकर मना कर दिया। इस वजह से वह दुखी और उदास रहती थी। मंगलवार को भी वह इस बारे में बात करती रही। शायद इसी मायूसी में उसने रात में घर से निकलकर खुदकुशी कर ली।