हंडिया के रहने वाले और स्वीडन में वैज्ञानिक आशुतोष तिवारी से किसी अज्ञात व्यक्ति ने 10 मिलियन स्वीडन क्रोना (करीब आठ करोड़ रुपये) की रंगदारी मांगी है। आशुतोष फिलहाल इलाहाबाद में हैं। आशुतोष के मुताबिक, रंगदारी के लिए पहली बार कॉल स्वीडन में ही आई। इसके बाद जब वह करीब एक माह पहले भारत लौटे तो यहां भी उनके मोबाइल पर कॉल कर फिर से रंगदारी मांगी गई। इसके बाद आशुतोष पुलिस के पास पहुंचे। प्रकरण वैज्ञानिक एवं एनआरआई से जुड़ा होने के चलते पुलिस भी सक्रिय हो गई। हंडिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कर मामला क्राइम ब्रांच की साइबर सेल को सौंपा दिया गया है। आशुतोष ने आशंका जताई है कि रंगदारी मांगने वाला स्वीडन का ही कोई व्यक्ति है।
आशुतोष करीब सात साल से स्वीडन में रहकर शोध कर रहे हैं। उनके माता पिता इलाहाबाद के सैदाबाद में रहते हैं। आशुतोष के मुताबिक, जब वह स्वीडन में थे तभी उनके पास अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने धमकी भरे लहजे में कहा कि अपनी और अपने परिवार की सलामती चाहते हो तो 10 मिलियन स्वीडन क्रोना दे दें। यह भी कि अगर पैसे नहीं दिए तो उन्हें और उनके परिवार को बर्बाद कर दिया जाएगा। धमकाने वाले ने ब्लाक व मेल के जरिए उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने की बात कही। चूंकि ऐसी कॉल पहली बार आई थी इसीलिए आशुतोष ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
इसके बाद 14 दिसंबर को फिर अज्ञात नंबर से कॉल आई, जिसे उन्होंने रिसीव नहीं किया। इसी दिन एक मेल में उनके शोध कार्यों, व्यवसाय को निशाना बनाया गया था।
आशुतोष 16 दिसंबर को भारत आए तो एक बार फिर रंगदारी के लिए फोन आया। इस बार कॉल करने वाले ने कहा कि, अगर पैसे का भुगतान कर देंगे तो सारी गलत मेलों को हटा दिया जाएगा। दर्ज रिपोर्ट में आशुतोष ने कहा है कि यह उनके खिलाफ एक योजनाबद्ध षडयंत्र के तहत यह किया जा रहा है। हैकिंग के माध्यम से उनकी व्यक्तिगत और व्यवसायिक जानकारी चुरा ली गई है। उन्हें क्षति पहुंचाने के लिए नकली आईडी और ब्लाग बनाए गए हैं। आशुतोष ने स्वीडन में ही कई वैज्ञानिकों पर संदेह जताया है।
हंडिया थाना प्रभारी ने बताया कि इस प्रकरण को लेकर स्वीडन में भी केस चल रहा है। दिसंबर के महीने में आशुतोष तिवारी सैदाबाद में थे और उन दिनों धमकी भरी कॉल आई थी। इसीलिए हंडिया थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा पूरी तरह से साइबर अपराध से जुड़ा हुआ है, इसीलिए इस प्रकरण की विवेचना क्राइम ब्रांच के साइबर सेल को सौंपी गई है।
एक ही तरह का अपराध दो देशों में दर्ज होने और आरोपी के स्वीडन में होने के कारण जांच में इंटरपोल की मदद ली जाएगी। या फिर वादी की सुविधा के अनुसार यह मुकदमा स्वीडन हस्तांतरित किया जा सकता है।