शहर से सटे झूंसी इलाके में कोहना गांव स्थित ईदगाह में शुक्रवार रात बारिश के दौरान दीवार ढहने से पांच मजदूरों की मौत हो गई। ये मजदूर ईदगाह में इंटरलाकिंग का काम करने आए थे। रात में वे ईदगाह के चबूतरे के बगल प्लास्टिक की पन्नियां डालकर सोए थे तभी दीवार उन पर मौत बनकर गिरी। रात भर वे मलबे में दबे रहे। सुबह अनहोनी का पता चला तो जेसीबी से मलबा हटाकर शवों को निकाला गया। खबर मिली तो मृतकों के परिवार के लोग पहले झूंसी थाने फिर एसआरएन अस्पताल स्थित चीरघर पहुंचे। हालांकि शनिवार को पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
कोहना गांव स्थित ईदगाह में 23 जून से फूलपुर विधायक की निधि से इंटरलाकिंग का काम चल रहा था। एक मिस्त्री और आधा दर्जन मजदूर काम में लगे थे। दिन भर काम के बाद मजदूर रात में ईदगाह में चबूतरे की दीवार के पास सोते थे। उन्होंने दीवार से सटाकर प्लास्टिक की पन्नियों के जरिए सोने की छांव बना ली थी। शुक्रवार रात भी भोज के बाद पांच मजदूर वहां सोए थे। मिस्त्री घर गया हुआ था। आधी रात में चबूतरे की नौ इंच मोटी दीवार ढह गई। मलबा गिरा सोए मजदूरों पर। वे रात भर मलबे के नीचे दबे रहे। शनिवार सुबह किसी ने देखा तो शोर मचाया तो भीड़ लग गई। फूलपुर के सपा विधायक सईद अहमद को पता चला तो तो उन्होंने झूंसी थाने की पुलिस को खबर दी। थानाध्यक्ष विजयप्रताप सिंह ने जेसीबी से मलबा हटवाकर पांच शव निकलवाए। मृतकों में सोरांव के माधोपुर गांव का रामनरेश (40), शेखपुर कठवल गांव निवासी कल्लू (22) पुत्र राजेंद्र प्रसाद, लालचंद्र (42) पुत्र नानू, सोनू (25) पुत्र सुरेश और बनवारी (40) पुत्र किशनलाल शामिल हैं। इनमें बनवारी मेठ था। शवों को पुलिस ने सीलकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। तब तक किसी का नाम नहीं मालूम हो सका था। दोपहर में जानकारी पाकर मृतकों के परिजन थाने आए तो शिनाख्त हो सकी। पुलिस को बताया गया कि ईदगाह में चबूतरे की पांच फुट ऊंची दीवार अभी कच्ची थी, जिसकी वजह से बारिश में भरभराकर ढह गई।
मृतकों के परिजनों को मिलेंगी चार-चार लाख
झूंसी में हुई घटना में मारे गए पांचों मजदूरों के परिजनों को दैवी आपदा के तहत चार-चार लाख रुपये की राहत राशि मुहैया कराई जाएगी। डीएम संजय कुमार ने बताया कि घटना के तत्काल बाद पीड़ित परिजनों को दस-दस हजार रुपये की सहयोग राशि उपलब्ध करा दी गई है। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30-30 हजार रुपये की मदद मुहैया कराई जाएगी। अगर मृतक मजदूरों के नाम पर जमीन रही होगी तो उनके परिजनों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। जिन मजदूरों का विवाह हो चुका था, उनकी विधवाओं को विधवा पेंशन या समाजवादी पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा भी देखा जा रहा है कि पीड़ित परिजनों को किस तरह की मदद मुहैया कराई जाए।