सिविल लाइंस में स्थित राजकीय मुद्रणालय में शनिवार आधी रात आग लग गई। कार्यालय के अंदर से धुआं और आग की लपटे उठती देख उधर से गुजर रहे कर्मचारी ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। तब फायर ब्रिगेड और सिविल लाइंस पुलिस पहुंची। लगभग चार घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। तब कार्यालय में रखे दस्तावेज राख हो चुके थे। आग काफी देर तक सुलगती रही। अफसरों का कहना है कि जले अभिलेख अनुपयोगी थे। आग गोपनीय कार्यालय और लाइब्रेरी तक नहीं पहुंची, वरना प्रदेश सरकार को बड़ा नुकसान होता।
सिविल लाइंस में जीटी रोड के बगल एकलव्य चौराहे के बगल राजकीय मुद्रणालय का दफ्तर है। शनिवार रात लगभग दो बजे गोपनीय कार्यालय के ठीक सामने स्थित दफ्तर में आग लग गई। वहां अनुपयोगी फाइलों को रखा जाता है। उधर से गुजर रहे एक कर्मचारी ने दफ्तर के अंदर धुआं सुलगते देखा तो पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना पाकर सीएफओ इंदू कुमार तिवारी, एफएसओ योगेंद्र कुमार चौरसिया, फायरमैन धर्मेंद्र कुमार मिश्र, राजेंद्र यादव, मुख्तार अहमद, राजेश कु मार के साथ पहुंचे। लेकिन तब तक आग फैल चुकी थी। दफ्तर के चारों तरफ आग की लपटें और धुआं ही नजर आ रहा था।
फायर ब्रिगेड आग पर काबू पाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को राजकीय मुद्रणालय कैंपस से ही पानी मिल गया। वरना आग बुझाने में और दिक्कत का सामना करना पड़ता। राजकीय मुद्रणालय में फायरकर्मियों की तैनाती रहती है। उन लोगों ने आग बुझाने में सहयोग किया। वरना आग बुझाने में और समय लगता। लगभग दस बजे आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सक ा। चर्चा है कि दफ्तर में आग काफी पहले लग गई। देर से पता चलने के कारण आग फैल गई। जबकि कार्यालय में दो गार्ड हमेशा तैनात रहते हैं। लेकिन उन्हें पता लगने देरी कैसे हुई। आग की वजह शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। आग की वजह और गार्डों को पता न चलने की बात जांच का विषय है।
सुलेमसराय पेट्रोल पंप के बगल अंडरग्राउंड केबिल डालने का काम चल रहा है। रविवार को कू ड़े के ढेर में लगी आग फैलकर केबिल तक पहुंच गई। केबिल को जलते देख अफरातफरी मच गई। जब तक आग पर काबू पाया जाता लाखों की केबल जलकर खराब हो गई।