जिले में बुधवार भोर और दोपहर में आए तूफान ने जमकर तबाही मचाई। पेड़ की डाल गिरने से चार लोगों की मौत हो गई।
मऊआइमा के मुस्तफाबाद की आंसमा (75) पत्नी अब्दुल हमीद तूफान आने के बाद पेड़ के नीचे बंधी बकरियों को हटाने के लिए घर से बाहर निकली। वह बकरियां खोल रही थी तभी नीम के पेड़ की एक डाल उसके ऊपर गिर गई। वह उसके नीचे दब गई। शोरगुल मचा तो घरवाले और गांव के लोग पहुंचे। जब तक डाली हटाई जाती आसमां दम तोड़ चुकी थी। आसमां की मौत से कोहराम मच गया। गंगापार में हंडिया के आमेपुर गांव के अकबर अली ईंट-भट्ठा कारोबारी हैं। उनका बेटा मोहम्मद इरफान (14) घर के बाहर सो रहा था। भोर में आंधी आने के बाद घर के लोग अंदर जाने के लिए उठकर भागे। इरफान भी अंदर जा रहा था तभी आम के पेड़ की डाल इरफान पर गिरी और मौके पर ही मौत हो गई।
आठवीं के छात्र की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया। तीन भाइयों में सबसे छोटा होने के चलते वह सबका चहेता था। उसकी मौत ने घरवालों को गहरा आघात लगा है। वहीं यमुनापार इलाके में बुधवार दोपहर आए भीषण तूफान ने भारी तबाही हुई। बारा के मदरहा गांव में आधी के चलते रेलवे लाइन के बगल में लगे यूकेलिप्ट्स के पेड़ बिजली के तारों पर गिर गए। जिसके चलते रेल यातायात बाधित हो गया। आरोप है कि रेलवे कर्मचारियों ने आसपास रहने वाले गरीब मजदूरों को लकड़ी लालच देकर काम पर लगा दिया। गांव का ही अमृतलाल प्रजापति (45) रेलवे लाइन पर गिरे पेड़ों को काटकर हटाने लगा। वह पेड़ काट रहा था तभी बिजली के तार पर गिरी डाली से झटका खाकर अमृतलाल ट्रैक पर गिरा। सिर के बल गिरने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
अमृतलाल की मौत से पत्नी अनारकली और बच्चों का रोकर बुरा हाल है। वहीं रेलवे अफसरों का कहना था कि अमृतलाल को पेड़ हटाने के लिए नहीं बुलाया गया। लगभग दो घंटे तक मौके पर ग्रामीणों और रेलवे कर्मचारियों के बीच नोंकझोंक होती रही। ग्रामीणों की मांग थी कि रेलवे प्रशासन मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता दे। वहीं लालापुर के घोघर गांव में दुबरी पाल की पत्नी चंद्रकली (45) घर के बाहर आम के पेड़ की छांव में बैठी थीं। तूफान आने के बाद वह घर के अंदर भागी लेकिन तब तक एक डाल टूटकर उसके ऊपर गिरी और मौके पर ही मौत हो गई।