डॉ. एके बंसल हत्याकांड की छानबीन कर रही पुलिस को दो बुलेट की तलाश है। शूटर ने डॉक्टर पर चार फायर किए थे। फर्श पर अलग बोर के चार खोखे भी मिले थे। मगर पोस्टमार्टम में दो ही गोलियों का पता चल सका। बाकी दो गोलियों की तलाश में सोमवार दोपहर फोरेंसिक टीम ने चैंबर को तीन घंटे तक बारीकी से खंगाला मगर कोई नतीजा नहीं निकला। पुलिस का कहना है कि कातिलों को सजा दिलाने के लिए ठोस सुबूत के तौर पर गोलियां मिलनीं जरूरी हैं।
बृहस्पतिवार शाम करीब सात बजे जीवन ज्योति हॉस्पिटल के चैंबर में घुसे शूटर ने डॉ. बंसल पर बेहद करीब से चार फायर किए थे। सभी गोलियां सिर और गले पर मारीं। मौके पर पुलिस को प्वाइंट 30 का एक और प्वाइंट 32 कारतूसों के तीन खोखे मिले थे। अलग बोर के कारतूसों की वजह से पुलिस ने माना है कि शूटर ने दो पिस्टल से फायर किए थे। फुटेज में भी भाग रहे शूटर के हाथों में पिस्टल दिखे हैं। डॉ. बंसल के शव के पोस्टमार्टम में पता चला कि उन्हें तीन गोलियां लगी थीं। दो गोलियां पार हो गई थीं जबकि एक गोली फंसी मिली थी। दूसरी गोली के बारे में पता चला था कि वह हड्डी से टकराकर टूट गई थी।
यानी दो गोलियां नहीं मिली हैं। पुलिस के अनुसार फायर चार हुए। डॉक्टर को गोलियां तीन लगीं। यानी एक गोली चैंबर में ही कहीं जाकर दीवार या दरवाजे में टकरा गई थी। यूं डॉक्टर के चैंबर में दो गोलियां होनी चाहिए थीं। घटना के बाद से जांच के चलते चैंबर की सफाई नहीं की गई है।
वहां केवल पुलिस अधिकारी और क्राइम ब्रांच तथा एसटीएफ के लोग ही छानबीन के लिए जाते हैं। सोमवार दोपहर फोरेंसिक टीम ने डॉक्टर के चैंबर में दो मिसिंग गोलियों की तलाश की। टेबल हटाकर फर्श पर खोजबीन की गई। इसके अलावा दरवाजों-खिड़कियों तथा छत पर बारीक नजर डाली गई। डस्टबिन भी हटाकर देखा मगर गोलियां मिली नहीं। फोरेंसिक टीम हैरान थी कि गोलियां गई कहां? एक डॉक्टर से भी पूछा गया जो घटना के बाद घायल डॉ. बंसल के साथ ऑपरेशन थिएटर में था। मगर डॉक्टर भी कुछ नहीं बता सका। शाम तक चैंबर को बारीकी से खंगालने के बाद फोरेंसिक टीम वहां से लौट गई।
फोरेंसिक टीम की जांच से पता चला है कि गोलियां धंसने के बाद डॉ.बंसल फर्श पर गिरे तो शूटर ने उनके सिर पर एक और फायर किया था। यह गोली सिर को पारकर फर्श में टकरा गई थी। उस जगह पर फर्श क्षतिग्रस्त हो गई थी। सोमवार को फोरेंसिक टीम की छानबीन के दौरान भी चैंबर की फर्श पर यह सुराख दिखा।