विख्यात लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. एके बंसल के कत्ल ने पुलिस अफसरों को सकते में डाल दिया है। आधी रात तक एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के साथ पुलिस अधिकारी घटना की तहकीकात में जुटे थे। पुलिस मान रही है कि हमले से पहले शूटर ने दो-तीन बार हॉस्पिटल में रेकी जरूर की होगी। तभी इतने सटीक ढंग से वारदात अंजाम दी। शूटरों ने हॉस्पिटल के अंदर आने और भागने के लिए वह रास्ता चुना, जहां उन्हें कोई रोकने वाला नहीं था। पुलिस अधिकारियों ने माना है कि गोली मारने वाला कोई पेशेवर शूटर था, जिसने बमुश्किल 30 सेकंड के भीतर वारदात अंजाम दी और साथी संग फरार भी हो गया।
जार्जटाउन में अमरनाथ झा मार्ग निवासी डॉ.एके बंसल बाई का बाग स्थित अपने जीवन ज्योति हॉस्पिटल में रोज दो बार मरीजों को देखते थे। दिन में 10 से दो बजे तक और शाम को छह से आठ बजे तक वह अपने चैंबर में बैठते थे। बृहस्पतिवार शाम करीब 6.35 बजे वह हॉस्पिटल में आकर अपने चैंबर में बैठे। पहले एक महिला मरीज मीन केसरवानी का चेकअप किया। फिर रीवा से आए वैद्यनाथ पांडेय को देखा।
उनके निकलने के बाद दो नए मरीज और कर्मचारी शैलेंद्र पाठक, स्वदेश और प्रशांत तिवारी चैंबर में थे, तभी दरवाजा खोलकर एक युवक अंदर आया। उसने पिस्टल तानकर डॉ.एके बंसल पर एक के बाद एक चार फायर झोंक दिए। दो गोलियां डॉ.बंसल के सिर और कनपटी पर लगी। वह रक्तरंजित होकर गिरे तो बदमाश बाहर निकला और दरवाजे के पास खड़े अपने साथी संग पिछले रास्ते से भागते हुए हॉस्पिटल के स्टैंड से होकर फरार हो गया। फायरिंग की आवाज सुनकर मेन गेट पर खडे़ सिक्योरिटी गार्ड और कर्मचारी चैम्बर की तरफ भागे।
घटना की छानबीन में जुटी एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने कर्मचारियों का बयान लेने के बाद सीसीटीवी फुटेज चेक किए। ज्यादातर कैमरे बंद मिले। दो कैमरों की फुटेज मिली लेकिन वह भी बेहद धुंधली। चैंबर से निकलने के बाद एक व्यक्ति भागता दिखा, जिसे पुलिस ने शूटर माना है। वह काले रंग की जैकेट पहने था और कैप लगाए था। हालांकि हुलिया साफ नहीं दिखा है। घटना के वक्त चैंबर में डॉ. एके बंसल के साथ मौजूद रहे कर्मचारी शैलेंद्र पाठक ने बताया कि काली जैकेट पहने शूटर तगड़े बदन का था। इससे ज्यादा वह ध्यान नहीं दे सका। दो महिला स्टाफ ने बताया कि शूटर गले में मफलर या गमछा डाले था लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
डॉ.बंसल को गोलियां मारकर शूटर के भागने के बाद हॉस्पिटल के कर्मचारी बेहद दहशत में थे। ऐसी खलबली मची कि सभी डॉक्टर और कर्मचारी वार्ड से निकलकर चैंबर के बाहर आ गए। महिला कर्मचारी और नर्स तो इस कदर खौफ में थीं कि रोने लगीं। दो महिला नर्स पुलिस और मीडिया को गोली मारकर भागे शूटर के बारे में बताते वक्त थरथर कांप रही थीं। उनके चेहरे से दहशत झलक रही थी। वे बार-बार बोल पड़तीं कि हे भगवान क्या हो गया, डॉक्टर साहब को बचा लो।
घटना के बाद बाई का बाग समेत आसपास के इलाके में अफरातफरी का आलम था। जो भी सुनता वो जीवन ज्योति हॉस्पिटल की तरफ चल देता। घटना के करीब घंटे भर के भीतर हॉस्पिटल के अंदर और बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। ऐसे में पुलिस बल को भीड़ नियंत्रण में लगा दिया गया। जाम लगने लगा तो ट्रैफिक पुलिस को रामबाग और कोठा पारचा चौराहा पर तैनात कर दिया गया। हॉस्पिटल के आसपास भीड़ और जाम के कारण ज्यादातर दुकानें भी बंद कर दी गई थीं।
डॉक्टर बंसल इलाहाबाद समेत आसपास के जिलों में विख्यात थे। यही वजह है कि उनके हमले की खबर फैलते ही शहर के ज्यादातर चिकित्सक जीवन ज्योति हॉस्पिटल पहुंच गए। प्रयाग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय अरोड़ा, प्रमिल केसरवानी, संजय अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में कारोबारी भी आ गए। एसएसपी और एसपी सिटी ने डॉक्टरों और व्यापारियों से बात की और भरोसा दिया कि वे शांति बनाए रखें तो अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
जीवन ज्योति हॉस्पिटल में अक्सर मरीजों और डॉक्टरों-कर्मचारियों के बीच झगड़ा होता रहा है इसलिए वहां सुरक्षा के लिए एक सिक्योरिटी एजेंसी के सौ से ज्यादा गार्ड्स की तैनाती है। गार्ड्स की ड्यूटी आठ-आठ घंटे के तीन शिफ्ट में लगती है। इसके अलावा डॉ.बंसल की हिफाजत के लिए अलग से निजी सुरक्षाकर्मी और कई बाउंसर साथ रहते हैं। मगर दुखद यह कि बृहस्पतिवार देर शाम डॉक्टर को गोलियां मारकर शूटर निकल गया और सुरक्षा का तामझाम धरा का धरा रह गया।