यमुनापार के औद्योगिक क्षेत्र में दो साल पहले जमीन की रंजिश में दो गुटों के बीच हुए खूनी संघर्ष में गोली से घायल विकास तिवारी को जेल जाने से बचाने के लिए डॉ. बंसल ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। डॉ. बंसल की डॉक्टरी रिपोर्ट का हवाला देकर आरोपी जेल जाने से बचता रहा। दूसरा पक्ष आरोपी को जेल भिजवाने पर आमाद था लेकिन डॉ. बंसल की रिपोर्ट के कारण पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। वह बार-बार रिपोर्ट देते रहे की घायल की हालत बेहद गंभीर है और वह अस्पताल से डिस्चार्ज करने लायक नहीं है। परेशान होकर दूसरा गुट अदालत पहुंचा। अदालत ने डॉ.बंसल को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा था । डॉ. बंसल हत्याकांड के बाद एसटीएफ और क्राइम ब्रांच इस विवाद को भी गहराई से खंगाल रही है।
दो साल पहले 20 दिसंबर 2015 को औद्योगिक क्षेत्र के ग्राम प्रधान विजय तिवारी शपथ ग्रहण कर लौट रहे थे। तभी प्रापर्टी डीलर संतोष सिंह उर्फ संतू गुट उनकी भिडंत हो गई। दोनों ओर से गोली बारी हुई। इसमें विजय तिवारी और संतोष सिंह की मौत हो गई। गैंगवार में विजय का भाई विकास तिवारी गोली लगने से गंभीर रूप से हआ था। दोनों तरफ से औद्योगिक क्षेत्र में क्रास रिपोर्ट दर्ज हुई। गोली से घायल विकास को जीवन ज्योति अस्पताल मेें इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।
चूंकि विकास भी हत्याकांड में नामजद था इसलिए उसकी गिरफ्तारी वांछित थी। मगर डॉ. बंसल से गहरे ताल्लुक का फायदा उठाकर वह उनके अस्पताल में महीनों इलाज कराता रहा। जबकि दूसरे गुट को डॉ. बंसल की यह करतूत रास नहीं आ रही थी। दूसरे गुट ने अदालत में अर्जी तो अदालत ने डॉ. बंसल को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद विकास तिवारी को जेल जाना पड़ा था।