कैंट स्थित आबकारी कॉलोनी में नोटों से भरा कुकर मिलने के मामले में अब तक सच्चाई सामने नहीं आ सकी है। पुलिस भी पसोपेश में है कि जब संबंधित अफसर ने खुद 25-30 लाख रुपये होने की बात बताई थी तो बाकी के रुपये कहां गए। फिलहाल मामले में आज उस सिपाही का बयान दर्ज किया जाएगा जिसने सबसे पहले नोटों की गिनती की थी, साथ ही मोबाइल से वीडियो भी बनाया था।
आबकारी विभाग में सहायक एल्कोहल टेक्नालॉजिस्ट के पद पर तैनात इंजीनियर दीपक रस्तोगी के सरकारी क्वार्टर के पीछे स्थित गैरेज में 21 जुलाई को नोटों से भरा कुकर मिला था। सूचना पर पहुंची पुलिस को केवल 7.93 लाख रुपये मिले थे। दीपक ने पुलिस को जो तहरीर दी थी उसमें कहा गया था कि कुकर में अनुमानत: 25-30 लाख रुपये थे। मामले की जांच सीओ और एसीएम कर रहे हैं। घटना के तीन दिन बाद भी यह नहीं पता चल सका है कि रुपये किसके थे और बाकी की रकम कौन ले गया। मामले में रविवार को ही दीपक का बयान दर्ज किया जा चुका है। फिलहाल बुधवार को उस सिपाही का बयान दर्ज किया जाना है जिसने सबसे पहले नोटों की गिनती की थी। दरअसल एक्साइज इंटेलीजेंस ब्यूरो के इसी सिपाही ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले नोटों की गिनती की थी। पुलिस को मिली तहरीर में भी इस बात का जिक्र है। इस संबंध में सीओ सिविल लाइंस श्रीश्चंद्र ने कुछ भी बताने से इंकार किया। उनका कहना था कि नियमानुसार जांच की जा रही है।
किसको बचाने की हो रही कोशिश
सूत्रों की मानें तो आबकारी विभाग के अफसरों की चुप्पी ने जांच टीम की मुश्किल बढ़ा दी है। उधर मौके पर मौजूद अफसर भी कुछ जानकारी न होने की बात बता रहे हैं। अफसरों की चुप्पी से कई तरह की चर्चाओं को भी बल मिल रहा है। दरअसल विभाग में ही अंदरखाने इस बात की भी चर्चा है कि किसी बड़े अफसर को बचाने के लिए ही मातहत मुंह नहीं खोल रहे हैं। वरना ऐसा कैसे हो सकता है कि इतनी भारी मात्रा में रकम कोई लेकर चला जाए और किसी को इसकी भनक तक न लग सके।