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चंद्रभान को बेटे की अंत्येष्टि में जानेे की नहीं मिली अनुमति

Tue, 07 Jun 2016 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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शव लाने पर गांव में जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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नैनी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे चंद्रभान को बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। परिजनों ने जिलाधिकारी को अर्जी देकर चंद्रभान को कुछ घंटे के लिए पेरोल पर छोड़ने की मांग की थी लेकिन नियम का हवाला देकर जिलाधिकारी ने अर्जी खारिज दी। आजीवन कारावास के मामले में तीन साल की सजा काटने के बाद ही पेरोल मिलती है। 
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सोमवार शाम को भारी पुलिस बल के साथ ज्ञानचंद्र और लालता प्रसाद का शव झूंसी के शेरडीह स्थित घर लाया गया तो कोहराम मच गया। गांव में दहशत का माहौल है। घटना के बाद से ही गांव छावनी में तब्दील है। लालता के परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया लेकिन ज्ञानचंद्र के परिजन शव घर के बाहर रखकर बैठ गए। उनकी मांग थी कि मृतक के पिता को पेरोल पर अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिले। भाई संतोष और ग्राम प्रधान मां सरस्वती देवी को सुरक्षा के साथ लाइसेंसी असलहा दिया जाए। नामजद आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। काफी देर रात पुलिस अफसर शव उठाने का इंतजार करते रहे। आखिरकार अफसरों ने ज्ञानचंद्र के परिजनों से बातचीत क र बताया कि कानूनी तौर पर चंद्रभान को पेरोल पर नहीं छोड़ा जा सकता। अन्य मांगें अफसरों ने मान लीं। तब परिजनों ने कहा कि रात में अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। मंगलवार सुबह शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। एहतियातन पीएसी और चार थानेदारों की ड्यूटी गांव में लगा दी गई है।  

शेरडीह ग्रामसभा का पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव बाबा इस वक्त नैनी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। वर्तमान में उसकी पत्नी सरस्वती देवी गांव की प्रधान है। रविवार को महिला ग्राम प्रधान का बेटा ज्ञानचंद्र उर्फ वकील आधा दर्जन लोगों के साथ पिता से जेल में मिलने गया था। जेल से मिलकर बाहर निकलते वक्त उस पर जानलेवा हमला किया गया। हमले में ज्ञानचंद्र के साथ-साथ लालता प्रसाद की मौत हो गई। साथ ही चार लोग घायल हो गए। सोमवार दोपहर तकरीबन साढ़े तीन बजे पोस्टमार्टम के बाद ज्ञानचंद्र और लालता का शव शेरहडीह गांव लाया गया तो कोहराम मच गया। कुछ देर बाद लालता के परिजनों ने छतनाग घाट पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया लेकिन ज्ञानचंद्र का अंतिम संस्कार देर शाम तक नहीं किया गया। अंतिम संस्कार अब मंगलवार को होगा। 
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पूर्व प्रधान चंद्रभान से दोस्ती में मारा गया लालता प्रसाद 
लालता की पूर्व प्रधान चंद्रभान से गहरी दोस्ती थी। वह चंद्रभान से मिलने अक्सर जेल जाया करता था। रविवार को भी वह बाबा के बेटे ज्ञानचंद्र के साथ चंद्रभान से मुलाकात कर बाहर निकल रहा था। तभी हुए हमले में उसकी मौत हो गई। लालता का शव सोमवार शाम  घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। पत्नी सावित्री देवी पति का शव देख बेहोश हो गई। बेटे महेंद्र, सुरेंद्र और राजेेंद्र का भी रो-रो कर बुरा हाल था। लालता प्रसाद के घर पर पुलिस का पहरा रहा। 

दोहरे हत्याकांड में ब्लॉक प्रमुख बहरिया और बीडीसी भी नामजद
नैनी सेंट्रल जेल गेट पर रविवार को खूनी रंजिश में हुए दोहरे हत्याकांड में ब्लॉक प्रमुख बहरिया चंद्रजीत यादव पुत्र बलवंत को भी नामजद किया गया है। उसके अलावा बीडीसी राजकुमार यादव का भी नाम एफआईआर में है। वह अशोक यादव का भतीजा है। अब तक अशोक यादव समेत एक दर्जन लोगों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। देररात ब्लॉक के प्रमुख के भी उठाए जाने की चर्चा रही। एसपी यमुनापार ने बताया कि ब्लॉक प्रमुख को भी इस हत्याकांड में नामजद किया गया है। बताया जाता है कि चंद्रजीत यादव और शैलेंद्र उर्फ लादे गुट का है। उनके बीच गहरी दोस्ती है। चंद्रजीत झूंसी इलाके का रहने वाला  भी है। घटना में शामिल बदमाशों की गिरफ्तारी के  लिए क्राइम ब्रांच, नैनी पुलिस समेत कुल पांच टीमें गठित की गई है। सभी टीमें अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कर रही हैं। एक टीम एमपी के रीवा में दबिश देने गई है। एक अन्य टीम जौनपुर और वाराणसी में दबिश दे रही है। वहीं तीन टीमें जनपद के विभिन्न इलाकों को में हत्यारोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दे रही हैं। उधर रविवार को उठाए गए अशोक यादव से पुलिस अफसरों ने कई दौर में पूछताछ की। अब तक इस हत्याकांड में दस लोगों को उठाया गया है। एसपी यमुनापार एके राय ने बताया कि इस मामले में ब्लॉक प्रमुख बहरिया चंद्रजीत यादव और बीडीसी राजकुमार भी नामजद हैं। गिरफ्तारी के लिए पांच टीम लगाई गई हैं। कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। छानबीन के बाद ही किसी को जेल भेजा जाएगा। 

ज्ञानचंद्र के  सीने में बदमाशों ने उतारी थीं 18 गोलियां 
नैनी सेंट्रल जेल रोड पर रविवार शाम सफारी सवार ज्ञानचंद्र उर्फ वकील, लालता प्रसाद और उनके साथियों को घेरकर बदमाशों ने अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। इसमें दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। सोमवार को डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया। ज्ञानचंद्र के सीने में 18 गोलियां दागी गई थीं। दो गोली शरीर में फंसी हुई मिली, जो 9 एमएम की है। बाकी पार हो गई थीं। पिस्टल और रिवॉल्वर से गोलियां दागी गई थीं। लालता प्रसाद के सीने में दो गोली लगी थी। दोनों पार हो गई थीं। 

हंगामा और गहमागहमी के बीच पोस्टमार्टम
सोमवार को शवों के पोस्टमार्टम के दौरान बवाल की आशंका के चलते आरएएफ, पीएसी के साथ कई थानों की फोर्स और अफसर मौजूद रहे। हंगामा और गहमागहमी के बीच शाम लगभग चार बजे पोस्टमार्टम समाप्त होने के बाद परिजन शव लेकर गांव शेरडीह झूंसी के लिए रवाना हुए। शव के साथ भारी पुलिस बल भी गांव तक गया। हत्याकांड को लेकर परिजनों, रिश्तेदारों और समर्थकों खासा आक्रोश था। कई बार पोस्टमार्टम हाउस के  पास तनातनी का माहौल बना लेकिन मामला संभलता गया। जब तीन बजे तक शवों का पोस्टमार्टम नहीं शुरू हुआ तो मृतकों के परिजन हंगामा करने लगे। आरोप था कि पुलिस प्रशासन के दबाव में डॉक्टर पोस्टमार्टम में देरी कर रहे हैं। अफसरों ने बीचबचाव कर मामला शांत कराया। 
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