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जिंदगी भर की टीस दे रहा चाइनीज मंझा

Mon, 26 Oct 2015 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। उल्लास और उत्साह की प्रतीक पतंग को उड़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाला खतरनाक चाइनीज मंझा लोगों के जीवन की डोर काट रहा है। सड़क चलते चाइनीज मंझा की चपेट में आकर कई लोग जान गंवा चुके हैं जबकि शहर में दर्जनों लोग ऐसे हैं जिन्हें इस मंझा से हुए जख्म ने जिंदगी भर की टीस दे दी है। ज्यादा दुखद और गंभीर बात यह है कि लगातार घटनाओं और प्रशासन से मनाही के बावजूद मंझा बिक रहा है।
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चाइनीज मंझा से मौत की सबसे ताजी घटना एक माह पुरानी है। मेयोहाल चौराहा के निकट विनायक अपार्टमेंट में रहने वाले शेयर कारोबारी अमिताभ बनर्जी का बेटा गौरव बनर्जी इंटर का छात्र था। वह 24 सितंबर की शाम अपनी दोस्त दिव्यानी जायसवाल के साथ नैनी की तरफ से स्कूटी पर शहर लौट रहा था। तभी नए यमुना पुल से गुजरते समय पतंग की डोर उन दोनों के गले में फंस गई। वह चाइनीज मंझा था जो गले में फंसकर टूटा नहीं। गौरव और दिव्यानी के गले में गहरा जख्म हो गया। उन दोनों को फौरन निजी अस्पताल ले जाया गया जहां गौरव की मौत हो गई। चाइनीज मंझा से उसकी श्वांस नली कट गई थी जो उसकी मौत का कारण बना। दिव्यानी की जान तो बच गई लेकिन उसे भी काफी तकलीफ झेलनी पड़ी।

नए पुल की दुखद घटना के अगले ही रोज करेली में अंबर पैलेस के निकट किसी पतंग के कटने पर चाइनीज मंझा सड़क से गुजर रहे मोहम्मद आरिस (17) के गले में फंस गया। आरिस ने गर्दन में घाव होने पर मंझा पकड़ा तो उसकी उंगलियां भी कट गईं। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया।  बिशप जानसन स्कूल में नौवीं का छात्र आरिस करेलाबाग में रहने वाले डॉक्टर मोहम्मद फारूख का इकलौता पुत्र है। चाइनीज मंझा के चलते महीने भर के भीतर तीसरा बड़ा हादसा भी करेली में हुआ।
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17 वर्षीय हमजा खान बाइक पर जा रहा था तभी उत्सव वाटिका के निकट उसके गले में चाइनीज मंझा फंस गया। गले में जख्म होने पर वह बाइक समेत सड़क पर गिर गया। उसे राहगीरों ने अस्पताल पहुंचाकर खबर दी। गौरव की मौत के बाद ही शहरियों और सामाजिक संगठनों के विरोध प्रदर्शन पर प्रशासन ने चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक का आदेश जारी करते हुए पुराने शहर के थानेदारों को निर्देश दिया था कि ऐसा मंझा बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। मगर इतने विरोध और प्रशासन से पाबंदी के आदेश के बावजूद खतरनाक चाइनीज मंझा की जगह-जगह बिक रहा है।

नतीजा यह कि अक्सर लोग इसकी जद में आकर जख्मी हो रहे हैं। दस रोज पहले मुट्ठीगंज में इस्कान मंदिर परिसर में भी इस मंझा ने एक व्यक्ति की जान खतरे में डाली थी। ये चार घटनाएं तो मालूम हो सकीं। जाने कितने ऐसे हादसे तो सामने ही नहीं पाते  जिनमें लोग जख्मी होने पर पास के अस्पताल में इलाज कराकर घर चले गए। जान बच भी जाती है तो चाइनीज मंझे के चलते गर्दन, चेहरे, हाथ आदि अंग पर हुए घाव जिदंगी भर का दर्द दे जाते हैं। चेहरे पर घाव से परेशान कई युवतियों को प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ी।

चार साल पहले इस खतरनाक चाइनीज मंझा ने दो बेटियों को बेसहारा कर दिया। कालिंदीपुरम में रहने वाली एक महिला को अपने पति के देहांत के बाद रेलवे में नौकरी मिली थी। उन्हें डीआरएम कार्यालय में तैनाती मिली थी। एक रोज वह सुबह स्कूटी पर ड्यूटी जा रही थीं तभी चौफटका रेलवे ओवरब्रिज से गुजरते समय उनके गले में चाइनीज मंझा फंस गया। गर्दन कटने से उनकी मौत हो गई। पिता के निधन और मंझा की चपेट में आने से मां की मौत ने दोनों बेटियों को बेसहारा कर दिया। मगर तब भी चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक नहीं लगाई जा सकी।
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