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आसान नहीं होगी सीबीआई की राह

Sat, 23 Jan 2016 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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अब से 11 साल पहले बसपा विधायक राजूपाल को दिन दहाड़े गोलियों से छलनी कर देने की घटना में जांच की राह सीबीआई के लिए भी आसान नहीं होगी। पुलिस इस मामले की दो बार जांच कर चुकी है। दोबारा जांच में नए मुल्जिमों के नाम सामने आए। इसकी अलग से चार्जशीट भी दाखिल की गई। मगर इन नए मुल्जिमों पर अभी आरोप तय नहीं हो सका है।
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सीबीआई को एक दशक से अधिक पुराने हो चुके मामले में नए साक्ष्यों की तलाश करनी होगी जो कम से कम अब आसान नहीं है। घटना के जांच के समय स्थानीय पुलिस द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्य शुरू से ही सवालों के घेरे में रहे हैं। राजू पाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठते रहे हैं। राजूपाल केस में पूर्व सांसद अतीक अहमद, उनके भाई और पूर्व विधायक अशरफ के अलावा रंजीतपाल, इशरार, अकबर, आबिद, फरहान, जावेद और बली पंडित के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। सभी अभियुक्तों के नाम सामने नहीं आ पाने की आपत्ति के बाद सीबीसीआईडी जांच के आदेश दिए गए। 
दोबारा जांच के बाद नफीस, गुलफुल, मो. कवि सहित छह और अभियुक्तों के नाम सामने आए। पुलिस इस मामले में कुल 17 अभियुक्तों के नाम सामने ला पाई है। बाद में सामने आए छह अभियुक्तों पर आरोप तय होना बाकी था। इससे पहले ही पूजापाल ने ट्रायल पर रोक लगाने के लिए सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी। सुप्रीमकोर्ट ने मामला हाईकोर्ट वापस भेजा। हाईकोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगाई मगर याचिका पर अंतिम निर्णय सुनाते समय इसे हटा दिया। पूजा पाल एक बार फिर सर्वोच्च अदालत पहुंची जहां ट्रायल पर शीर्ष की रोक लग गई। 
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सुप्रीमकोर्ट द्वारा ट्रायल पर रोक लगाने से पहले हत्याकांड की सुनवाई कर रही अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 14 की अदालत में राजूपाल केस के लगभग सभी गवाहों का परीक्षण हो चुका था। अहम गवाह राजूपाल की पत्नी पूजा पाल और मां रानी पाल की गवाही ही शेष थी। रानी पाल की मौत हो चुकी है। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए। इनमें वह लोग भी शामिल हैं जो घटना के समय राजूपाल के साथ थे और घायल हुए थे।
हालांकि बाद में अतीक आदि के खिलाफ गवाहों को डरा-धमका कर गवाही बदलवाने का मुकदमा भी दर्ज हुआ, मगर उसमें भी आरोपी अधिकांश मुकदमों में बरी हो चुके हैं। घटना की जांच अब सीबीआई के हाथ में है। मगर इसके साथ सवाल यह भी उठ रहे हैं कि एक ऐसी घटना जिसमें शुरू से ही पुलिस की भूमिका पर सवाल उठता रहा है सीबीआई क्या नया खोज पाएगी। राजूपाल की हत्या में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल है। साक्ष्यों से छेड़छाड़ और उसे नष्ट करने का भी आरोप है। आरोप यहां तक है कि हत्या के बाद पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी छेड़छाड़ हुई है। जानकारों की माने तो सीबीआई को अब दस्तावेजी साक्ष्यों और उन्हीं गवाहों के सहारे ही आगे बढ़ना होगा जो पूर्व में अपने बयान से मुकर चुके हैं। 
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