सोरांव के बिगहिया मेें एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या के मामले में पुलिस को गुमराह करने की भी कोशिश की गई। हत्यारों ने इसका भी प्रयास किया कि घटना की वजह लूटपाट लगे। इसके लिए उन्होंने बक्से व आलमारी का ताला तोड़ दिया व सामान भी बिखेर दिए। मौका मुआयना के बाद अफसरों ने भी आशंका जताई कि लूटपाट के लिए वारदात हुई। हालांकि नामजद तहरीर मिलने के बाद मामला पलट गया। पुलिस ने बताया कि कमलेश देवी का शव जिस कमरे में मिला, वहां बक्सा व आलमारी रखी थी। जांच पड़ताल के दौरान दोनों के ताले टूटे मिले। आलमारी में रखा सामान बिखरा हुआ था और कपड़े भी फेंके हुए थे। उधर बक्से का रखा सामान भी बिखरा हुआ था। कमरे में रखी अन्य चीजें भी अस्त व्यस्त थीं। मौका मुआयना के बाद पुलिस अफसरों का भी यही कहना था कि हो सकता है कि लूटपाट के लिए इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। पुलिस का कहना था कि गंगापार क्षेत्र के कई इलाकों में इस तरह के गिरोह सक्रिय हैं जो लूट के लिए हत्या की वारदात को अंजाम देते रहे हैं। पूर्व में भी इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि नामजद तहरीर मिलने के बाद कहानी उलट गई।
पुलिस ने बताया कि चारों को धारदार हथियार से हमला कर मौत के घाट उतारा गया। हालांकि ऐसा कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है। मौके से एक सब्बल व लोहे की रॉड मिली है। आशंका है कि वारदात में दोनों चीजों का इस्तेमाल किया गया। इन्हें कब्जे में ले लिया गया है। जांच की जा रही है। चार लोगों की हत्या पर बिगहिया गांव कुछ ही देर में छावनी मेें तब्दील हो गया। एक के बाद एक यहां पुलिस विभाग के उच्चाधिकारी पहुंचने लगे। सबसे पहले एसएसपी नितिन तिवारी पहुंचे। कुछ देर बाद एसपी गंगापार सुनील कुमार सिंह भी आ गए। उधर आईजी मोहित अग्रवाल व एडीजी जोन एसएन साबत भी पहुंच गए। अफसरों ने फील्ड यूनिट की टीम को भी बुलाया। खोजी कुत्ता करीब डेढ़ किमी तक गांव में ही चक्कर लगाता रहा। वह पड़ोसी गांव स्थित हनुमान मंदिर और फिर नहर तक जाने के बाद वापस चला आया। उधर फोरेंसिक टीम ने भी खून के नमूने लिए।
संदिग्ध गतिविधियों से हुआ संदेह
पुलिस का कहना है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतका कमलेश के नवाबगंज के टिकरी कौड़िहार गांव निवासी बेटी प्रिया के साथ उसका पति अमर भी बिगहिया पहुंचा। उसके साथ उसका पिता भी था। पुलिस का कहना है कि अमर के पिता की गतिविधियां काफी संदिग्ध थीं। पहले तो वह फूट-फूटकर रोता रहा। बीच-बीच में वह बेसुध भी हो जाता रहा। पुलिस का कहना है कि उस पर संदेह हुआ लेकिन हालात देखकर वह चुप रही। इसी बीच प्रतापनारायण के परिजनों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया। चूंकि उनमें घटना को लेकर जबरदस्त आक्रोश था। ऐसे में पुलिस ने अमर के पिता को वहां से हटा दिया। हालांकि बाद में तहरीर मिलने के बाद उसे हिरासत में ले लिया।
मामले में नामजद जेठ ओमप्रकाश 10 साल पहले इंटर कॉलेज से प्रवक्ता के पद पर रिटायर हुआ है। उसके तीन बेटों में मनोज, विनोद व प्रमोद शामिल हैं। प्रतापनारायण के घरवालों ने मनोज को भी नामजद किया है। पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि मनोज अपने परिवार के साथ शहर के तेलियरगंज में रहता है। हालांकि वह अक्सर घर आया जाया करता था। प्रतापनारायण के परिजनों ने पुलिस को बताया है कि अमर को मालूम था कि प्रतापनारायण व उसकी पत्नी रिंकी के न रहने पर संपत्ति उसकी बीवी व उसके नाम हो जाएगी। आरोप है कि संपत्ति पर ओमप्रकाश व उसके बेटे मनोज की भी नजर थी। ऐसे में मिलकर पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रची गई।
एक परिवार के चार लोगों की हत्या की घटना से गांव के लोग आक्रोशित भी दिखे। सूचना पर पुलिस के साथ प्रशासनिक अफसर भी मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कोशिश की तो लोगों ने विरोध भी जताया। वे पुलिस व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस पर अफसरों ने उन्हें समझाया। आश्वासन दिया कि मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। तब जाकर लोग शांत हुए और अफसरों ने तब राहत की सांस ली।