आम कैदियों के लिए भले ही रोज अपने रिश्तेदारों और करीबियों से मिलना मुनासिब नहीं हो लेकिन नैनी सेंट्रल जेल में बंद पूर्व सांसद अतीक अहमद का दबदबा पहले की तरह ही बना है। जेल में जैमर लगने की वजह से भीतर फोन काम नहीं कर रहे इसलिए अब बाहरी दुनिया से संपर्क के लिए मिलाई जरूरी हो गई है। चार रोज से जेल में बंद अतीक अहमद से करीबी रिश्तेदार और उनका काम संभालने वाले मिलने पहुंच रहे हैँ। जेल सूत्रों के मुताबिक, प्रतिबंध के बावजूद देर शाम तक जेल में अतीक के पास उनके करीबी आते रहते हैं।
उनसे मिलने वाले ज्यादातर लोगों का कोई रेकार्ड भी नहीं रखा जा रहा है। अतीक का नाम भर लेने पर करीबी लोगों को जेल में प्रवेश मिल जाता है। जेल के भीतर बाकायदा अतीक का दरबार लग रहा है। उन्हें विशेष सुरक्षा सेल में रखा गया है जहां चार नंबरदार (सजायाफ्ता कैदी) उनकी चाकरी में लगे रहते हैं। जेल के सूत्र तो बताते हैं कि उनका खाना, पानी और पान रोज बाहर से जेल में ले जाया जा रहा है। हालांकि जेल अफसरों से बात करिए तो वे कहते हैं कि अतीक समेत सभी कैदियों से मुलाकात के लिए जेल मैनुअल का पालन कराया जा रहा है।
शहर पश्चिमी की निवर्तमान बसपा विधायक पूजा पाल ने पांच माह पहले हाईकोर्ट में अर्जी देकर शिकायत की थी कि पूर्व सांसद अतीक अहमद उनके पति विधायक राजू पाल हत्याकांड में अदालत की जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्हें 2005 में हुए हत्याकांड के बाद कोर्ट से जमानत इन शर्तों पर मिली थी कि वह गवाहों और वादी को धमकाएंगे नहीं और उनके आसपास नहीं जाएंगे। कोई आपराधिक गतिविधि नहीं करेंगे लेकिन अतीक ने जमानत मिलने के कुछ ही समय बाद 28 फरवरी 2006 को मुख्य गवाह उमेश पाल को अगवा कर धमकाया और दूसरे रोज जबरन कोर्ट में उनसे झूठा बयान कराया था। इसके अलावा पिछले साल अतीक के भाई अशरफ और उनके आदमी भी सुलेमसराय जयंतीपुर में उमेश पाल के घर के पास गए थे। इस आधार पर पूजा ने अतीक की जमानत खारिज करने की मांग की थी।
राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह अधिवक्ता उमेश पाल ने अतीक अहमद से कई बार जान को खतरा जताया है। उन्होंने पांच जुलाई 2007 को अतीक, अशरफ समेत उनके करीबियों के खिलाफ अपहरण और बंधक बनाकर बयान बदलने की धमकी देने का केस दर्ज कराया था। उमेश का आरोप है कि अतीक ने 28 फरवरी 2006 को जीटी रोड पर सुलेमसराय केनिकट फांसी इमली के पास से उन्हें अगवा किया। चकिया में अपने कार्यालय ले जाकर बंधक बनाकर पीटा और धमकाया ताकि दूसरे रोज वह कोर्ट में बयान बदल दें। उमेश पाल ने उस मुकदमे में पिछले साल 16 और 17 अगस्त को कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। उमेश का दावा है कि अतीक के 38 साल के आपारधिक इतिहास में तमाम धमकियों के बावजूद उनके खिलाफ बयान दर्ज ेकराने वाले वह पहले गवाह हैं।