केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने शुक्रवार को कहा कि मुद्दा विहीन विपक्ष दलितों, पिछड़ों को गुमराह कर रहा है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार दलित, पिछड़ा, मुसलमान विरोधी नहीं, बल्कि हितैषी सरकार है। 1990 में लाए गए ओबीसी कमीशन को मोदी सरकार ने संवैधानिक दर्जा देने का निर्णय लिया है। अगले मानसून सत्र में प्रमोशन में आरक्षण और एससीएसटी एक्ट की रक्षा के लिए संशोधन विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। उन्होंने अगड़ा वर्ग को भी आरक्षण देने की वकालत की। कहा कि अति गरीब सवर्णों को भी 25 प्रतिशत आरक्षण देने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि यह झगड़ा हमेशा के लिए खत्म हो जाए।
सिविल लाइंस स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वह अंबेडकर का संविधान बदलना चाहते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। मोदी ने खुद कहते हैं कि अंबेडकर का संविधान न होता तो वह पीएम न बन पाते। उन्होंने कहा कि बसपा अध्यक्ष मायावती दलितों को सबसे अधिक गुमराह कर रही हैं। कहा कि जिस बीजेपी के सहयोग से वह सीएम की कुर्सी तक पहुंच सकीं, उसी के खिलाफ बार-बार मनुवाद का आरोप लगाना शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि मायावती को सपा के साथ गठबंधन का निर्णय नहीं लेना चाहिए था। 2019 के चुनाव में इस सरकार को हराने के लिए सपा-बसपा एक होकर भी कुछ नहीं कर पाएंगी। 15 फीसदी दलित भाजपा के साथ है और रहेगा। विपक्ष के पास कोई चेहरा भी नहीं है। अभी यह तय नहीं है कि राहुल पीएम बनेंगे या शरद पवार, मायावती, मुलायम या ममता। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार दलित-मुस्लिम विरोधी नहीं, सबका साथ-सबका विकास के नारे को लेकर चल रही है। थप्पड़ मारो, आरक्षण लो... के कल्याण सिंह के बयान पर अठावले ने कहा कि इसकी व्याख्या गलत नहीं की जानी चाहिए। उनके कहने का आशय था कि आरक्षण पिछड़ों का हक है और मिलना चाहिए।