लगा था जीजा की हत्या का आरोप, भांजे समेत हुआ था नामजद
सुशीला के कांस्टेबल पति ने की थी आत्महत्या, बाद में हुआ था समझौता
11 बिस्वा जमीन का भी था विवाद, रास्ते को लेकर भी चल रही थी तनातनी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
नवाबगंज में दो भांजों की हत्या का आरोपी मामा तीरथ पर अपने ही जीजा की हत्या का भी आरोप लगा था। खुद बहन सुशीला ने ही उस पर यह आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें तीरथ की एक अन्य बहन का बेटा भी आरोपी बनाया गया था। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया था।
पुलिस ने बताया कि पसियापुर के रहने वाले सुनील व अनिल के पिता अशर्फीलाल पुलिस विभाग में कांस्टेबल पद पर कार्यरत थे। उनकी कौशाम्बी के चायल थाने में तैनाती थी। उसी दौरान हुई एक हत्या के बाद अशर्फीलाल परिवार समेत ससुराल नवाबगंज के पसियापुर जाकर रहने लगा था। 2013 में संदिग्ध हालत में अशर्फीलाल की लाश घर में ही फांसी पर लटकी मिली थी। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में सुशीला ने तीरथ व अपनी बहन के बेटे गोविंद के खिलाफ थाना नवाबगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई। पोस्टमार्टम में अशर्फी की मौत का कारण हैंगिंग आया था। बाद में जमानत मिलने पर दोनों आरोपी रिहा हो गए लेकिन मुकदमा चलता रहा। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान गोविंद का आरपीएफ में एसआई पद पर चयन हो गया। हालांकि मुकदमे में नामजद होने की वजह से इसमें अड़चन आ रही थी। एक साल बाद रिश्तेदारों, गांव के बड़े-बजुर्गों के हस्तक्षेप पर दोनों पक्षों में समझौता हो गया। इस समझौते के तहत तीरथ ने अपनी एक जमीन की रजिस्ट्री बहन सुशीला के नाम कर दी, जिस पर मकान बनाकर सुशीला परिवार समेत रहती थी।
जिसने बसाया, उसी ने उजाड़ दिया परिवार
ग्रामीणों की मानें तो बहन सुशीला और उसके परिवार को उसके भाई तीरथ ने ही पसियापुर में बसाया था। तीरथ ने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि चायल में तैनाती के दौरान हुई हत्या के बाद अशर्फीलाल बेहद भयभीत था। उसे अपने और अपने परिवार की चिंता सता रही थी। ऐसे में उसने तीरथ से बात की जिसके बाद तीरथ ने ही उसे अपने गांव पसियापुर बुलाकर रहने के लिए जमीन दी थी। इसके एवज में अशर्फीलाल ने उसे 22 हजार रुपये दिए थे। ग्रामीणों में इस बात की भी चर्चा रही कि जिसने गांव में बसाया, उसी तीरथ ने इस परिवार को उजाड़ दिया।
जमीन के विवाद में बिगड़े रिश्ते
गांववालों का यह भी कहना है कि चायल से आने के बाद कुछ दिनों तक सुशीला और तीरथ के रिश्ते बहुत अच्छे रहे। प्रधानी का चुनाव लड़ने के दौरान बहन के परिवार ने उसकी हरसंभव मदद भी की। हालांकि वह जीत नहीं सका। दोनों परिवारों के बीच खटास 11 बिस्वा जमीन को लेकर आई। दरअसल, घर के बगल स्थित जमीन को तीरथ खरीदना चाहता था और इसके लिए उसकी गांव की ही एक महिला से दो लाख में सौदा भी तय हो गया। हालांकि अशर्फीलाल ने ज्यादा कीमत देकर उस जमीन को खरीद लिया। यहीं से दोनों परिवारों में विवाद हो गया।
दाखिल-खारिज न होने से नहीं हो पाई रजिस्ट्री
पुलिस का कहना है कि अशर्फीलाल ने जमीन खरीद तो ली थी लेकिन दाखिल-खारिज न होने की वजह से ही जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पाई। दरअसल तीरथ पहले से उसी जमीन को रेहन पर लेकर गेहूं की फसल उगाता था। ऐसे में जमीन पर उसका कब्जा बना हुआ था। पूछताछ में पुलिस को तीरथ ने बताया है कि दो महीने पहले सुनील व अनिल ने गेहूं के खेत से जबरन रास्ता बना लिया। विरोध करने पर उन्होंने तीरथ को सरेआम बेइज्जत किया। साथ ही मारपीट भी की। इसके बाद आए दिन वे गालीगलौच करने लगे थे।
घर में पड़े रहे दो शव,17 घंटे बाद पुलिस को हुुई जानकारी
नवाबगंज दोहरा हत्याकांड: पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। नवाबगंज के पसियापुर में सगे भाइयों की हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। हालात यह रहे कि घर में दो लाशें पड़ीं रहीं। एक महिला मरणासन्न हालत में मौत से लड़ती रही। इसके बावजूद पुलिस को करीब 17 घंटे बाद मामले की जानकारी हो सकी।
पसियापुर में हुई इस जघन्य वारदात की जानकारी नवाबगंज पुलिस को सोमवार शाम करीब पांच बजे हुई। पुलिस के पहंचने पर पता चला कि जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल महिला मौत से लड़ रही है। इसके बाद आननफानन में पुलिस उसे अस्पताल ले गई जहां से उसे एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया। पहले पुलिस यही कहती रही कि घटना दोपहर में हुई। हालांकि घटनास्थल की हालत देखने वाले प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि घटना काफी देर पहले हुई। सूत्रों की मानें तो मौके पर बहा खून जमकर काला पड़ गया था। बृहस्पतिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने बताया कि हत्या 18 मार्च की रात में की गई। इससे साफ है कि पुलिस को मामले की जानकारी मिलने में 17 घंटे का वक्त लग गया। इस बारे में नवाबगंज एसओ बचन सिंह सिरोही का कहना है कि घटनास्थल थाने से काफी दूर है। शाम करीब पांच बजे जैसे ही जानकारी मिली, पुलिस मौके की तरफ भागी।
आरोपी के परिजनों ने सांसद से मांगा इंसाफ
नवाबगंज। फूलपुर के नवनिर्वाचित सांसद नागेंद्र सिंह पटेल बृहस्पतिवार दोपहर में पीड़ित परिवार से मिलने पसियापुर गांव पहुंचे। हालांकि वहां ताला बंद मिला। इस दौरान आरोपी तीरथ की पत्नी व अन्य महिलाओं ने सांसद से इंसाफ की गुहार लगाई। आरोप लगाया कि पुलिस तीरथ को फर्जी आरोप लगाकर फंसा रही है जबकि वह निर्दोष है। सांसद ने आश्वासन दिया कि मामले में अफसरों से बात कर जांच कराई जाएगी।