फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारहवीं के छात्र ने लगाई फांसी

विज्ञापन
विज्ञापन
सोहबतियाबाग में बारहवीं के छात्र ने की आत्महत्या
विज्ञापन

0 माता-पिता के स्कूल जाने के बाद लगा ली घर में फांसी
0 छोटा भाई घर आया तो देखा, माता-पिता रोकर बेहाल
दीवाली पर मचा कोहराम
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। शहर के सोहबतियाबाग इलाके में सोमवार को शिक्षिका मां और कंप्यूटर इंजीनियर पिता के कॉलेज जाने के बाद बारहवीं के छात्र शिवांग कुशवाहा ने आत्महत्या कर ली। दोपहर में छोटा भाई स्कूल से लौटा तो उसे फांसी पर लटका देख रोने-चीखने लगा। फिर माता-पिता समेत रिश्तेदार और पड़ोसी पहुंच गए। जार्जटाउन थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को चीरघर भेज दिया। सदमे में डूबे परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि बेटे ने ऐसा क्यों किया।
सोहबतियाबाग में रहने वाले दयाशंकर कुशवाहा कंप्यूटर इंजीनियर हैं। वह म्योराबाद स्थित एक कॉलेज में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी प्रेमलता शिक्षिका हैं। वह फाफामऊ के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने जाती हैं। दो बेटों में शिवांग (18) बड़ा था। वह गोल्डन जुबली इंटर कॉलेज में बारहवीं का छात्र था। छोटा पुत्र सूर्यांश भी उसी कॉलेज में पढ़ता है। सोमवार सुबह पहले प्रेमलता और दयाशंकर अपने-अपने कॉलेज चले गए। सूर्यांश भी स्कूल गया लेकिन शिवांग घर पर ही रह गया। दोपहर करीब पौने एक बजे सूर्यांश घर आया तो मेन गेट बंद था। वह चहारदीवारी फांदकर अंदर गया मगर चैनल गेट भी बंद था। बगल के स्टोर रूम का दरवाजा बंद था लेकिन सिटकनी नहीं लगी थी। उसे खोलकर सूर्यांश भीतर गया तो नजारा देख सन्न रह गया। वह रोते-चीखते बाहर आया और लोगों को बताया कि शिवांग कमरे में फांसी पर लटका है। पड़ोसी अंदर गए तो देखा कि स्टोर रूम में तख्त पर रखे बक्से पर चढ़कर शिवांग ने केबल का फंदा बनाकर फांसी लगा ली थी। उसके पैर बक्से को छू रहे थे। खबर पाकर पहुंची जार्जटाउन थाने की पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया फिर शिवांग का शव सीलकर चीरघर भेज दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

000000
बेटे का शव देख मां की हालत बिगड़ी
फोन पर खबर पाकर कुछ देर में पिता दयाशंकर और मां प्रेमलता भी रोते-बिलखते आए और बेटे का शव देख वे दोनों सदमे में डूब गए। प्रेमलता को ऐसा आघात पहुंचा कि उन्हें डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। जार्जटाउन पुलिस ने पिता दयाशंकर से बात की तो उन्होंने कहा कि शिवांग कुछ दिन से तनाव में दिख रहा था। गुमसुम और उदास रहता पर किसी से कुछ बताया नहीं। वह पढ़ने में भी बेहद तेज था। जाने क्या हुआ कि उसने जान देकर परिवार की खुशियां छीन लीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें