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50 बैंक खातों से उड़ा दी रकम, गिरफ्तार

Thu, 19 Jan 2017 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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गिरफ्तार - फोटो : file photo
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एटीएम कार्ड नंबर और कोड के जरिए लोगों के बैंक खातों से ऑनलाइन ट्रेन और प्लेन टिकट बुक कराकर चूना लगाने वाले एक सिविल इंजीनियर संजीव कुमार सिंह को क्राइम ब्रांच की सर्विलांस टीम ने धूमनगंज पुलिस की मदद से दबोच लिया। उसके कब्जे से लैपटॉप, फर्जी आईडी पर खरीदे गए 14 सिमकार्ड, पांच मोबाइल फोन, सात एटीएम कार्ड के अलावा एक डायरी बरामद हुई, जिसमें सौ से ज्यादा लोगों के कार्ड नंबर और पिन कोड दर्ज किए गए थे।
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एसपी क्राइम मो. इरफान अंसारी ने बताया कि छह महीने के दौरान शहर में एटीएम कार्ड के जरिए खातों से रकम उड़ाने के करीब पचास केस दर्ज होने पर सर्विलांस सेल को गंभीरता से छानबीन कर गिरफ्तारी का जिम्मा सौंपा गया। बुधवार को साइबर क्राइम टीम के उपनिरीक्षक शंभू दयाल मौर्या, सिपाही मो. मोईद, धीरेंद्र सिंह, आमोद कुमार, सोनू यादव ने राजरूपपुर में पीएनबी गेट पर एक संदिग्ध को पकड़ लिया। उसके पास एक बैग था जिसकी तलाशी लेने पर एक लैपटॉप, सिमकार्ड, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड आदि के अलावा एक डायरी भी मिली, जिसमें तकरीबन सवा सौ लोगों के एटीएम कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट, पिन कोड दर्ज थे। पकड़ा गया संजीव कुमार मूल रूप से बिहार में गोपालगंज जनपद का रहने वाला है। उसने पालीटेक्निक से सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स किया था।

मौजूदा समय में वह यहां फाफामऊ के शांतिपुरम में किराए के कमरे में टिका था। एसपी क्राइम के मुताबिक, संजीव ने करीब आठ महीने के दौरान इलाहाबाद, पीलीभीत, गोरखपुर में 50 से ज्यादा लोगों के बैंक खाते से करीब 60 लाख रुपये उड़ाए। इनमें तकरीबन सभी पीड़ित पीएनबी के खाताधारक हैं। संजीव ने अपने ही गांव के दोस्त नजीबुल के साथ यह गोरखधंधा शुरू किया था। वे दोनों पीएनबी के एटीएम में जाते और पीछे से लोगों के डेबिट कार्ड का नंबर तथा पिन कोड टाइप करते देख लेते थे। फिर वे कार्ड नंबर और पिन कोड के जरिए ही आईआरसीटीसी से प्लेन और ट्रेनों के टिकट बुक कराते थे।
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संजीव का दिल्ली में लक्ष्मीनगर के ट्रैवेल एजेंट कपिल गुप्ता तथा कोलकाता के सौरभ बोस से संपर्क था। दोनों इसे फोन पर बताते थे कि किन यात्रियों के नाम किन ट्रेनों या प्लेन में कहां से कहां के लिए टिकट बुक करना है। वे दोनों यात्रियों से पैसे लेकर संजीव के बैंक खाते में ट्रांसफर कर देते थे। संजीव का कहना है कि उसे बीस फीसदी ही रकम मिलती थी, मगर क्राइम ब्रांच को आशंका है कि उसे 50 फीसदी तक रकम दी जाती रही होगी। दोनों एजेंट फरार हो गए हैं।

एसपी क्राइम ने बताया कि संजीव ने कानपुर की एक फर्म में बतौर सीनियर इंजीनियर नौकरी की थी। वहीं उसने चित्रकूट की रहने वाली महिला कर्मचारी से दोस्ती गांठ ली। पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का पिता होने के बावजूद संजीव नौकरी छोड़कर अपनी प्रेमिका के साथ इलाहाबाद आ गया। वे दोनों फाफामऊ में किराए के कमरे में लिव इन रिश्ते में रहने लगे। प्रेमिका उसके साथ पत्नी की तरह रहने लगी। नौकरी छोड़ने के बाद पैसों की जरूरत होने की वजह से संजीव दोस्त नजीबुल के साथ यह गुनाह करने लगा। उसने पीलीभीत के एडीजे के भी खाते से करीब सवा लाख रुपये उड़ाए थे। उस मामले में नजीबुल पीलीभीत में पकड़ा गया जबकि संजीव फरार हो गया था। संजीव की प्रेमिका अभी यहां एक कोचिंग से पढ़ाई कर रही है। पुलिस ने बताया कि उसने इस फ्राड के जरिए लाखों रुपये उड़ाए। अपने घर में मकान बनाने के लिए मोट रकम भेजी। उसे सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल नंबर के सहारे दबोचा जा सका है।
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