सिक्किम विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर हुई वित्तीय अनियमितता की सीबीआई जांच में कई अफसरों से पूछताछ हो सकती है। इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो जीसी त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि वह इस जांच में सीबीआई का हर सहयोग करने के लिए तैयार हैं। इस मामले की जांच के लिए गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को जो तथ्य उपलब्ध कराए गए थे, उसी के आधार पर उन्होंने मानव संसाधन मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी थी।
सिक्किम हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई की कोलकाता अपराध निरोधक शाखा की ओर से वहां के विश्वविद्यालय में वित्तीय वर्ष 2009-10 और 2010-11 में बड़े पैमाने पर हुए वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। इस मामले में तत्कालीन कुलपति प्रो. महेंद्र पी लामा, उर्मिला लामा, ललित कुमार छेत्री, राहुल लामा, नोरबु तमांग और बीके छेत्री के अलावा कुछ अज्ञात लोक सेवकों व व्यक्तियों के विरुद्ध सीबीआई ने 26 अक्तूबर 2017 को केस दर्ज किया था। इससे पहले सिक्किम विश्वविद्यालय में हुई इस वित्तीय अनियमितता की शिकायत की जांच के लिए तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बीएचयू के तत्कालीन कुलपति प्रो जीसी त्रिपाठी की अध्यक्षता में गठित की गई थी। इस कमेटी में यूजीसी के सचिव व एक अन्य अफसर को नामित किया गया था। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने इस मामले की जांच रिपोर्ट वर्ष 2015 में प्रस्तुत की थी। इस मामले की जांच कर रही सीबीआई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों का भी परीक्षण कर रही है। प्रो. त्रिपाठी ने अमर उजाला को बताया कि सिक्किम विश्वविद्यालय व वहां के तत्कालीन कुलपति की वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए मेरी अध्यक्षता में मानव संसाधन मंत्रालय ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की थी। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी थी। मुझको पता लगा है कि उन्हीं अनियमितताओं के विरुद्ध हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच शुरू की है और फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्यों से सहयोग मांगा है। मैं अपना अपेक्षित सहयोग सीबीआई जांच में अवश्य करूंगा।