यमुनापार के मांडा इलाके में मंगलवार दोपहर जेट्रोफा के पौधों से फल तोड़कर खाने से महेवा कला गांव के 20 स्कूली बच्चों की हालत खराब हो गई। जेट्रोफा खाने के बाद ये बच्चे अपने घर चले गए थे, जहां शाम को उन्हें उल्टी-दस्त होने लगे। इससे बच्चों के घर और गांव में खलबली मच गई। सभी बच्चों को एंबुलेंस से मांडा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से रेफर करने पर उन्हें शहर में एसआरएन अस्पताल में भर्ती किया गया।
पांच से 13 साल के ये सभी बच्चे मांडा में महेवा कला गांव के रहने वाले हैं। वे गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। मंगलवार दोपहर करीब दो बजे स्कूल से घर वापसी के दौरान ये बच्चे दूधनाथ पटेल के खेत के बगल से गुजरे। दूधनाथ ने अपने खेत में जेट्रोफा के पौधे लगा रखे हैं। स्कूल से लौट रहे एक बच्चे ने फल तोड़कर खाया। उसे देख एक के बाद एक तमाम बच्चों ने फल तोड़कर खा लिए।
उस वक्त सभी बच्चे अपने-अपने घर चले गए। मगर शाम पांच बजे के बाद जेट्रोफा का फल खाने वाले बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। बच्चों के घर और गांव में हाहाकार मच गया। लोगों ने 108 नंबर पर खबर दी तो एक एंबुलेंस गांव पहुंची। बीमार हुए सात बच्चों को मांडा में अस्पताल ले जाया गया। कुछ देर बाद 13 और बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दो एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों को एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया। तीन एंबुलेंस में बीस बच्चों को देर रात शहर लाकर चिल्ड्रेन अस्पताल में भर्ती किया गया। उनमें कुछ बच्चे बेसुध हो गए थे।
जेट्रोफा का फल खाकर बीमार होने वाले बच्चों में देवा केसरी (8), आर्यन पटेल (10), मिथिलेश सिंह (6), बबिता पटेल (12), दीपक केसरी (6). काजल (5), बिंदिया (7), अरविंद (11), आकाश (8), विकास (5), शहनवाज (10), अंकित (7), दिशांत (6), शिवा (8), सर्वेश 11) चेतना (9), रवि यादव (7), मोहम्मद शमीम (9), सुमित प्रजापति (8), शनि (5) शामिल हैं। उनके परिजन घबराकर रोने लगे तो खबर पाकर तमाम रिश्तेदार भी आ गए। जेट्रोफा के फल की पेराई से निकलने वाले तेल को ईंधन की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसे फल समझकर खाने के चलते पहले भी झूंसी समेत कई इलाकों में कई बच्चों की जान खतरे में पड़ चुकी है।