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गवन के सुसाइड नोट को पचाने की फिराक में पुलिस

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गवन के सुसाइड नोट को नहीं भेजा प्रयोगशाला
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0 शहर के हाई प्रोफाइल मामले में पुलिस का रवैया ढीलाढाला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
जमुना क्रिश्चियन कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य आरके गवन की आत्महत्या के मामले में उनके सुसाइड नोट को रविवार तक विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा जा सका है, जबकि इस मामले में पूरी कार्रवाई ही सुसाइड नोट पर टिकी है। मसीही समुदाय के लोगों में इस लेकर रोष है। पुलिस पर आरोप है कि वह कुछ लोगों को बचाने के लिए ढीलाढाला रवैया अपना रही है।
जमुना क्रिश्चियन कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य आरके गवन ने 18 अप्रैल को घर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। 78 वर्षीय गवन पर भूमाफिया होने एवं जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए मुट्ठीगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। गवन समेत 11 अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज था। पुलिस ने प्रांम्भिक विवेचना में नौ लोगों को क्लीन चिट दे दी, जबकि गवन और विनोद बी लाल के खिलाफ 1 अप्रैल को चार्जशीट लगा दी। गवन के परिजनों का आरोप है पुलिस की इसी एक तरफा कार्रवाई के दबाव में आकर गवन ने अपनी जान ले ली। उनकी जेब से दो सुसाइड नोट बरामद हुए थे। अपने लेटर हैड पर लिखे एक सुसाइड नोट में पुत्र धीरज उर्फ नानू को रोमन हिंदी में पांच लाइनों में नसीहतें दी गईं थीं, जबकि हिंदी में लिखे दूसरे नोट में रुद्रनारायण पाठक, उदयप्रताप सिंह एवं शिवबहादुर सिंह के उत्पीड़न का जिक्र किया था। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। इंस्पेक्टर मुट्ठीगंज निशिकांत प्रधान का कहना है कि जब तक यह बात सिद्ध न हो जाय कि गवन ने ही सुसाइड नोट लिखा है, वह कार्रवाई नहीं कर सकते, लेकिन सुसाइड नोट को हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से जांच कराने के लिए आज तक विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा जा सका था। घरवाले जल्द ही इस रवैये की शिकायत अधिकारियों से करेंगे।
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सुसाइड नोट में लिखी पीड़ा
आरके गवन ने सुसाइड नोट में लिखा कि जमीन का पूरा विवाद एलडीटीए अधिकारियों, सचिव और समय-समय पर चुने गए डायरेक्टर्स की जानकारी में था। यह पूरा स्थान एलडीटीए का था। इस पर कोई विवाद नहीं था। क्रिश्चियन को प्लाट एलॉट करने के बाद घर बनाए गए। कभी भी कहीं से उनको कोई चैलेंज नहीं किया गया और न कहीं से कोई आपत्ति आई। केवल 2015-16 में उपरोक्त लोग 143 नं. प्लॉट को हड़पकर लगभग 1 करोड़ रुपये में उसे बेचने की तैयारी में थे। एलडीटीए की आपत्ति पर यह सारा उपरोक्त विवाद खड़ा किया गया।
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