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ग्यारह नामजदों को बाहर करने से दबाव में थे गवन

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78 की उम्र में गुहार लगाई, किसी ने नहीं सुनी
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0 पत्नी ने बताई पीड़ा, कहा केस दर्ज होना बना गवन मौत का कारण
0 नौ नामजदों को बाहर कर उनके खिलाफ चार्जशीट से थे आहत
0 पुलिस की जांच रिपोर्ट पर गवन के परिजनों ने खड़े किए सवाल
इलाहाबाद।
जमुना क्रिश्चियन कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य आरके गवन की आत्महत्या के मामले में उनके परिजनों ने पुलिस रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने गवन के खिलाफ एकतरफा पुलिसिया कार्रवाई का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इसी सदमे के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली।
पूर्व प्रधानाचार्य की पत्नी आईई गवन बताती हैं, ‘आरके गवन करीब पांच दशक तक शिक्षण कार्य से जुड़े रहे। उनके खिलाफ जब केस हुआ तब वह 78 के थे। वह सदमे में थे। यह बात उनको कचोटने लगी थी। मुझसे वह अपनी तकलीफ का जिक्र करते थे। विवेचना के दौरान होने वाला पुलिसिया व्यवहार भी उनको काफी दुखी करता था। चार्जशीट दाखिल होने पर वह और अधिक परेशान हो गए थे। वह सीढ़ी नहीं चढ़ पाते थे, फिर भी उन्होंने उच्चाधिकारियों की चौखट पर जाकर गुहार लगाई पर सुनवाई नहीं हुई। अंत में उन्हें आत्मघाती कदम उठाना पड़ा।’
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आरके गवन के तीसरे बेटे धीरज का कहना है करीब तीन वर्ष पहले जमुना चर्च परिसर की उत्तर की ओर खाली करीब पांच विस्वा खाली जमीन को लेकर विवाद की शुरुआत हुई। कुछ लोगों की निगाह इस जमीन पर थी, लेकिन विरोध के चलते वह कब्जा नहीं कर सके। इसके बाद मुट्ठीगंज पुलिस ने 3 दिसंबर 2017 को काशी नरेश के केयर टेकर बताने वाले रुद्र नारायण पाठक की तहरीर पर 11 लोगों ऊषा हेमिल्टन, रिंकी स्वरूप, अरुण पॉल, काल्विन थायोडोर, विनोद बी लाल, एसबी लाल, डेनियल सुभान, आरके गवन, कमल मसीह, प्रफुल्ल मसीह, शशि प्रकाश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इन सभी पर भूमाफिया होने एवं जान से मारने के लिए धमकाने के आरोप में केस दर्ज कराया गया। 1 अप्रैल को जांच अधिकारी ने 11 लोगों की नामजदगी को गलत बताते हुए गवन और विनोद बी लाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। इससे गवन पूरी तरह हताश हो गए और आत्मघाती कदम उठा लिया।
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उल्लेखनीय है कि पुलिस ने मुट्ठीगंज में जमीन हड़पने के मामले में गवन और विनोद बी लाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसके बाद से ही गवन मानसिक रूप से परेशान थे। परिजनों ने इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ शिकायत पुलिस के आला अफसरों से करने का मन बनाया है।
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