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ईद की पार्टी में युवक की गोली मारकर हत्या

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पार्टी में युवक की गोली मारकर हत्या
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दोस्त ने लाइसेंसी पिस्टल से चार गोलियां मारी
मोबाइल नहीं मिलने पर शुरू हुआ था आपस में विवाद
लाश 17 किलोमीटर दूर गुमटी नंबर 40 के पास फेंकी
कई घंटे बाद दोस्तों ने मर्डर की बात कुबूली, निशानदेही पर शव की हुई बरामदगी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। धूमनगंज की केंद्रांचल कालोनी में सोमवार रात अपने दोस्तों के साथ पार्टी मना रहे युवक की दोस्त ने ही गोली मारकर हत्या कर दी। वह भी बेहद मामूली बात पर। घर चलते वक्त दोस्त का मोबाइल नहीं मिला। वही बात इतनी बढ़ गई कि युवक को मार डाला गया। इतना ही नहीं, उसके शव को गद्दे में लपेटकर 17 किलोमीटर दूर फाफामऊ के आगे 40 नंबर गुमटी के पास फेंक दिया। कई घंटों की जद्दोजहद के बाद दोस्तों ने मर्डर की बात कुबूल कर ली। इसके बाद शव बरामद हुआ। मुख्य आरोपी घर से भागा हुआ है। तीन दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सुलेम सराय के पास रम्मन का पुरवा मुहल्ले का रहने वाला विवेक सिंह (28) प्रापर्टी डीलिंग का काम करता था। सोमवार को ताड़बाग में रहने वाले उसके दोस्त मनोज सिंह ने अपने जीजा के केंद्रांचल कालोनी स्थित घर पर पार्टी रखी थी। मनोज अपनी स्कार्पियो लेकर रात में विवेक को बुलाने गया था। विवेक ने घर पर कहा कि वह ईद की पार्टी में जा रहा है। गाड़ी में नरेंद्र, अमरदीप और सिद्धार्थ पहले से मौजूद थे। वे सीधे केंद्रांचल कालोनी पहुंचे। देर रात तक दारू-मुर्गे की पार्टी चलती रही। करीब 12 बजे विवेक के बड़े भाई अमित सिंह ने उसके मोबाइल पर फोन किया। वह बोला कुछ देर में आ रहे हैं। आधे घंटे बाद मां निर्मला सिंह ने फिर उसके मोबाइल पर फोन किया। इस बार फोन पर बस इतनी आवाज आई कि चलो अब निकलते हैं। इसके बाद फोन कट गया फिर स्विच ऑफ हो गया। घरवालों ने सोचा कि बैटरी खत्म हो गई होगी। वे भी निश्चिंत होकर सो गए कि विवेक आ रहा है। सुबह पांच बजे मां निर्मला देवी जागीं तो विवेक नहीं आया था। उन्होंने घबराकर दोनों बेटों अमित और नवीन को जगाया। दोनों विवेक की तलाश में मनोज के घर पहुंच गए। वह बोला कि रात में पार्टी के बाद वह अपने घर चला आया था। उसे कुछ नहीं मालूम। अमित उसे लेकर केंद्रांचल कालोनी गया जहां पार्टी हुई थी लेकिन घर में ताला लगा था। अब अमित का दिल भी घबराने लगा। वह तुरंत थाने पहुंचा और मौजूद दरोगा से पूरी बात बताई। अधिकारियों को भी दाल में कुछ काला लगा। मनोज के साथ ही नरेंद्र और अमरदीप को भी पकड़कर थाने लाया गया। सिद्धार्थ अपने घर से गायब था। पुलिस ने घंटों कड़ाई से पूछताछ की तब जाकर उन्होंने अपना मुंह खोला। बताया कि विवेक का रात में सिद्धार्थ ने मर्डर कर दिया है। देर रात चलते समय सभी नशे में धुत थे। सिद्धार्थ का मोबाइल नहीं मिला तो वह सबकी तलाशी लेने लगा। इसी बीच विवेक ने कह दिया कि रात ज्यादा हो गई है। सुबह ढूंढ लेना। इसी बात पर उसकी सिद्धार्थ से कहासुनी शुरू हो गई। बात हाथापाई तक पहुंची। इतने में सिद्धार्थ ने अपना लाइसेंसी पिस्टल निकालकर विवेक को गोली मार दी। उसने एक के बाद एक चार गोलियां उसके शरीर में उतार दीं। इसके बाद सब लोग बुरी तरह से डर गए। वे लाश को एक गद्दे में लपेटकर स्कार्पियो से गुमटी नंबर 40 पहुंचे और जंगल में लाश फेंक दी। मंगलवार की दोपहर पुलिस घरवालों और आरोपियों को लेकर गुमटी नंबर 40 पहुंची और लाश को बरामद कर लिया। सीओ डीपी तिवारी ने बताया कि मनोज, नरेंद्र और अमरदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है। सिद्धार्थ की तलाश में दबिश दी जा रही है। सिद्धार्थ टैगोर टाउन का रहने वाला है। वह भी प्रापर्टी डीलर है।
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आंसू नहीं रुक रहे निर्मला के
विवेक सिंह की मां निर्मला देवी के आंसू नहीं रुक रहे हैं। सोमवार की शाम विवेक ने बताया कि वह घर पर खाना नहीं खाएगा, बाहर पार्टी है। ये कोई नई बात नहीं थी, विवेक अक्सर बाहर खाना खाता था। रात में जब वह 12 बजे तक नहीं आया तो उन्हें चिंता शुरू हुई। उन्होंने बड़े बेटे अमित को विवेक का नंबर लगाने को कहा। आधे घंटे जब उनका मन नहीं माना तो उन्होंने खुद फोन किया। इस बार विवेक से बात तो नहीं हुई लेकिन इतना सुनाई पड़ा कि वह आ रहा है। उसका इंतजार करते करते उनकी आंख लग गई। सुबह पांच बजे नींद टूटी तो सबसे पहले विवेक को देखने उसके कमरे गईं। उनका दिल घबराने लगा। उसी समय से उनके आंसू नहीं रुक रहे थे। दोपहर में जब विवेक की हत्या की खबर मिली तो वह टूट गईं।
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परिवार पर कहर, पहले पिता हुए लापता अब बेटे की हत्या
मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले इंद्रदेव सिंह के परिवार पर कुछ सालों में जैसे कहर टूट पड़ा हो। आरईएस विभाग में जेई रहे इंद्रदेव का परिवार खुशियों से सराबोर था। पिता जेई थे। तीनों जवान बेटे काम पर लग गए थे। अमित गाड़ियां चलवाने लगा था। नवीन की सिविल लाइंस में फोटोस्टेट की दुकान हो गई और विवेक प्रापर्टी डीलिंग के धंधे में था। ढाई साल पहले इंद्रदेव सिंह की पोस्टिंग लखनऊ में थी लेकिन वह बरेली में रह रहे थे। लखनऊ से पहले वह वहीं पोस्टेड थे। एक दिन अचानक घर से बाहर गए तो फिर आज तक वापस नहीं आए। तब से उनका कुछ पता नहीं है। बड़े बेटे अमित सिंह ने बताया कि पुलिस की तमाम जांच हो चुकी है लेकिन अभी तक उनका कुछ पता नहीं चला। गुमशुदगी के दौरान ही वह रिटायर भी हो गए। परिवार इस सदमे से कभी उबर नहीं पाया था, अब विवेक हत्या ने परिवार को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया है।
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